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(वीकेंड पोस्ट के 15 फ़रवरी 2014 के अंक में मेरा कॉलम)

एक और शब्द है जिसका धड़ल्ले से बिना सोचे-समझे उपयोग होता है -- अवतार। बचपन से पढते सुनते आये हैं कि इस धरा पर भगवान अवतार लेते आये हैं। आजकल यह काम कोई भी कर लेता है --''आनेवाली फ़िल्म में दीपिका नए अवतार में नज़र आएँगी'', मतलब यही है न कि दीपिका को नया रोल मिला है। ऐसा शीर्षक भी देखा है -''नए साल में मल्लिका कैबरे डांसर के अवतार में होगी'', तो क्या कैबरे करनेवाली वास्तव में देवियाँ होती हैं? जो अवतार लेकर इस धरती का कल्याण हैं ? अधनंगी-नंगी होकर नाचना क्या दैवीय कार्य है? 

वैलेंटाइन वीक में प्यारभरे तोहफों का दौर चलता रहता है, लेकिन हमारा मीडिया पूरे 52 सप्ताह 'तोहफे' दिलवाता रहता है। ऐसा लगता है कि मीडिया के मित्रों का शब्द-भंडार कम है और वे फैसले, आदेश, अधिकार और वितरण जैसे शब्दों की जगह तोहफा लिख देते है. तोहफे भी ऐसे अजब-ग़ज़ब कि दिमाग भन्ना जाए। उदाहरण के लिए --'एक अप्रैल से मिलेगा कर्मचारियों को बढे हुए वेतन का तोहफा', 'फलां जिले को मिला कृषि विश्वविद्यालय का तोहफा', 'दीपावली पर कर्मचारियों को मिलेगा बोनस का तोहफा', 'फलां गाँव को मिला सड़क का तोहफा', 'अल्पसंख्यकों को मिलेगा आरक्षण का तोहफा', 'अजा-अजजा को मिलेगा प्रमोशन का तोहफा', 'बेघर लोगों को मिलेगा घर का तोहफा' वगैरह-वगैरह।

बढ़ा हुआ वेतन, सड़क, बोनस, आरक्षण, प्रमोशन, शिक्षा केन्द्र का खुलना आदि वे चीज़ें हैं जिन पर लोगों का अधिकार है। शिक्षा, मकान, वेतन वृद्धि,सड़क, आरक्षण, प्रमोशन आदि में तोहफे जैसी क्या बात है? यह तो अधिकार है और अधिकार तोहफा कैसे हो सकता है? तोहफा देने का अर्थ है --किसी को प्रसन्न करने के लिए धन, वस्त्र या उसके काम या पसंद की वस्तु, जो बिना किसी अपेक्षा के प्रदान की जाती हे, तोहफा कहलाती है। तोहफा या उपहार मन की खुशी को प्रकट करने के लिए या किसी को सम्मानित करने के लिए भी दिए जाते हैं, इनके बदले में किसी धन की अपेक्षा नहीं की जाती है। हांलांकि यह अपेक्षा अंतर्निहित हो सकती है कि जिसको उपहार दिया गया है वह अपना प्रेम और कृपा देने वाले पर बनाए रखेगा। अड अधिकार होता है और तोहफा, तोहफ़ा।

बात यहाँ तक भी होती तो ठीक था, पर कई बार तोहफे के नाम पर अजीबोगरीब शीर्षक देखने को मिलते हैं : मसलन 'पूनम पाण्डेय देंगी भारतीय टीम के सामने न्यूड होने का तोहफा' या 'सनी लियोन ने ट्विटर पर दिया हॉट तोहफा' या 'पामेला एंडरसन ने फेन्स को दिया फड़कता तोहफा ', या ''कैटरीना ने दिया रणवीर को प्यार का तोहफा' या 'सलमान खान ने दिया सुपर हिट का तोहफ़ा'. ऐसे शीर्षकों का अर्थ क्या है? कोई बताए तो कि इन तथाकथित सुंदरियों के 'तोहफों' से किसी का भला हो जाएगा? सलमान खान की फ़िल्म सुपर हिट रही तो यह तोहफा कैसे? क्या फ़ोकट में जनता को फ़िल्म दिखाई गई थी? तहफा तो जनता ने हीरो को फ़िल्म सुपर हिट कराकर दिया।

एक और शब्द है जिसका धड़ल्ले से बिना सोचे-समझे उपयोग होता है -- अवतार। बचपन से पढते सुनते आये हैं कि इस धरा पर भगवान अवतार लेते आये हैं। आजकल यह काम कोई भी कर लेता है --''आनेवाली फ़िल्म में दीपिका नए अवतार में नज़र आएँगी'', मतलब यही है न कि दीपिका को नया रोल मिला है। ऐसा शीर्षक भी देखा है -''नए साल में मल्लिका कैबरे डांसर के अवतार में होगी'', तो क्या कैबरे करनेवाली वास्तव में देवियाँ होती हैं? जो अवतार लेकर इस धरती का कल्याण हैं ? अधनंगी-नंगी होकर नाचना क्या दैवीय कार्य है? एक शीर्षक देखकर तो सचमुच ही माथा कूटने का मन करने लगा -''अर्जुन-रणबीर की जोड़ी अब गुंडे के अवतार में.''

…आप ही बताइए -- क्या करुं? खुद का माथा कूटूँ या शीर्षक लिखनेवाले सिर फोडूं?

--प्रकाश हिन्दुस्तानी

(वीकेंड पोस्ट के 15 फ़रवरी 2014 के अंक में मेरा कॉलम)

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