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4-September-2011

रविवासरीय हिन्दुस्तान, ४ सितंबर २०११ के एडिट पेज पर मेरा कॉलम

लियोनेल आंद्रेस मेसी अर्जेंटीना फ़ुटबाल टीम के स्टार स्ट्राइकर हैं, जर्सी नबर टेन. उम्र 24 साल, लेकिन दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फुटबाल खिलाड़ियों में नाम शुमार है. 21 की उम्र में ही वे 'फीफा वर्ल्ड प्लेयर ऑफ़ ईयर' का ख़िताब पा चुके हैं. डिएगो मेराडोना उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित कर चुके हैं. फुटबालप्रेमियों का एक बड़ा वर्ग उन्हें पेले से बेहतर खिलाड़ी मानता है.फुटबाल के दीवाने कहते हैं कि मेसी खिलाड़ी नहीं,कलाकार हैं; क्योंकि वे फुटबाल खेलते नहीं, बल्कि मैदान में फ़ुटबाल से कविता लिखते हैं, चित्रकारी करते हैं, या संगीत की तान छेड़ते लगते हैं.

उनके खेल में नशा पैदा करने की ताकत है. वे फ़ुटबाल मैदान के जादूगर हैं और वे मैदान में दर्शकों और साथी खिलाड़ियों को भी अपने खेल से विस्मित कर देते है.भारत भी उनके दीवानों का बड़ा वर्ग है. फेसबुक पर जब उनके नाम का अधिकारिक पेज बनाया गया तो केवल एक दिन में सत्तर लाख लोग उस से जुड़े, जो एक रिकार्ड है. मैसी के जादू और उनकी सफलता के कुछ सूत्र :

तकदीर से मुकाबला

मेसी अपनी तकदीर से मुकाबला करके इस मुकाम पर पहुंचे हैं. अर्जेंटीना के स्टील मिल मजदूर और सफाईकर्मी मां की चार संतानों में से एक मेसी ने पाँच साल के होते ही फुटबाल का खेल सीखना शुरू कर दिया था. 11 की उम्र में वे ग्रंडोली क्लब की तरफ से खेलने लगे थे लेकिन उनके पिता को पता चला कि मेसी को ग्रोथ हार्मोन डिफिशियंसी है और इलाज का खर्च है करीब 900 डॉलर हर माह. एक फुटबाल क्लब के संचालक मैसी की प्रतिभा से वाकिफ थे, उन्होंने मदद के पहले मैसी का खेल देखा और कलब की तरफ से एक एग्रीमेंट तैयार किया. उस एग्रीमेंट का महत्व इसी से समझा जा सकता है कि वह टॉयलेट पेपर पर लिखा गया था. इस तरह अपनी तकदीर से मैसी की पहले जंग शुरू हुई.

फुटबाल ही इबादत है

मेसी के रोम रोम में फुटबाल है. लगभग सभी महान खिलाड़ी केवल अपने पैरों से नहीं, अपने रोम रोम से फुटबाल खेलते हैं. पैर, टखना, घुटना, सिर सब फुटबाल के लिए होता है, लेकिन मेसी के खेल में खास बात होती है बिजली की तेज़ी से कौंधता उनका दिमाग और उससे संचालित उनका शरीर जो अनपेक्षित को अपेक्षित कर दिखता है और मैदान में मौजूद हजारों लोग बार बार जोश और जुनून से भर जाते हैं. फुटबाल के प्रति ऐसी प्रतिबद्धता देखने के मौके बिरले ही मिल पाते है.

ख़ास ट्रिक्स का इस्तेमाल

हर खिलाड़ी की अपनी ख़ास ट्रिक्स होती है, इसमें रचनात्मकता, अलग अंदाज़ और मनोरंजन का पुट भी होता है और सबसे अहम् बात है यह खेल की जीत में बड़ा योगदान देती हैं. दूसरे खिलाड़ियों की ट्रिक्स को समझकर उन्हें उलझाना और अपनी खास ट्रिक्स के जरिये संकट के दौर में बाहर आ जाने की यह कला ही फ़ुटबाल को कलात्मक बना देती है. होपिंग, अल्टरनेटिव होपिंग, नी लेमंस, नी होपिंग, फ्लिप, नो टच बेक, नी अल्टरनेटिव जैसी ट्रिक्स की भी दर्ज़नों शैलियाँ मैसी ने विकसित कर ली हैं, जिन्हें केवल देखकर मज़ा लिया जा सकता है, लिखा नहीं जा सकता.

परिपूर्णता के साथ खेलें

मैसी की जर्सी का नंबर दस है और वे खेल में भी परफैक्ट टेन हैं. किसी भी खिलाड़ी के लिए यह ग्रेड पाना आसान नहीं होता. मैदान में उनका फुटबाल पास करने का तरीका बहुत तेज़ होता है. वे आम तौर पर इतनी तेजी से पास देते हैं कि सामनेवाली टीम का खिलाड़ी उसे रोक ही नहीं पाता. विरोधी टीम का खिलाड़ी फुटबाल को लेकर किस किस तरफ जा सकता है, इसका अंदाज़ वे लगा लेते हैं और आगे की रणनीति बना लेते हैं, यह सब इतनी तेज़ी से होता है कि सामनेवाला खिलाड़ी भौंचक रह जाता है. उन्हें अपनी प्रतिभा पर तो भरोसा होता ही है, स्पर्धी खिलाड़ी की गलतियों का लाभ लेने की कला पर भी विश्वास रहता है.

छोटा कद, बड़े इरादे

मैसी केवल पांच फुट सात इंच ऊँचे है. जापान की फुटबाल टीम में भी इस कद से लम्बे खिलाड़ी हैं. छोटे कद को उन्होंने अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और अपनी बिजली की गति और खेल कौशल से इस प्राकृतिक कमी को छुपा लिया. वे हमेश इसी कोशिश में रहते हैं कि भले ही उनका रिकार्ड ना बने, लेकिन टीम जीतना चाहिए. गोल के पास जाने के बाद भी वे खुद गोल मारने का लालच नहीं करते और निर्णायक गोल बनने के लिए पास देने से नहीं चूकते. बीते साल फीफा वर्ल्ड कप के चार मैचों में वे खुद एक भी गोल नहीं मार सके, लेकिन उनके निर्णायक पास के कारण उनकी टीम के दूसरे खिलाड़ियों को गोल बनाने के मौके मिले.

अच्छा खेलकर जीतें

मैसी का लक्ष्य केवल जीतना नहीं, अच्छा खेलना और अच्छा जीतना होता है. वे जानते है कि फ़ुटबाल टीम का खेल है और इसीलिये वे अपनी टीम के सदस्यों को पूरा तवज्जो देते हैं. अर्जेन्टीना की टीम में मैसी के अलावा जेवियर मैस्केरानो, एजेंलो डी मारिया, कार्लोस तेवेज भी अच्छे खिलाड़ी माने जाते हैं और ये चरों खिलाड़ी किसी भी टीम की नक् में दम करने के लिए बड़ी शक्ति हैं. इंटरपासिंग के मामले में अर्जेंटीना दुनिया की नंबर एक टीम है। टीम का मिडफील्ड ताकतवर है और मैसी सबसे जानदार खिलाड़ी

नेतृत्व क्षमता विकसित करें

मैसी ने अपने भीतर नेतृत्व के ऐसे गुण विकसित कर लिए हैं कि कई बार टीम के कोच की बजाय उनकी बातें सुनने को ज्यादा पसंद करती है. उनके साथी खिलाड़ियों को विश्वास में लेने की कला उनमें खूब है. मैसी को ड्रिब्लिंग में उस्तादी है जो उन्होंने अपने साथी खिलाड़ियों को भी सिखाने में सफलता पाई है. स्ट्राइकर के वे रूप में बेहद आक्रामक खिलाड़ी हैं और उनका गज़ब का फुटवर्क है. वे पास लेने और देने में माहिर हैं और निशाने पर गोल साधने में चुस्त. वे अपना हर हुनर साथी खिलाड़ियों के साथ शेयर करना टीम के हित में मानते हैं.

सामाजिक कार्य भी ज़रूरी

मैसी ने 2007 में लियो मैसी फाउंडेशन की स्थापना की थी जिसका मकसद है जरूरतमंद बच्चों को स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना.उनका कहना है कि अगर आप मशहूर हैं तो दूसरों की मदद करना आसान हो जाता है. यह एक जरिया है जिससे आप उपकार का बदला चुकाने की कोशिश करते हैं. मैसी यूनीसेफ के सद्भावना राजदूत के रूप में भी कार्य कर रहे हैं. प्रो इव्योल्युशन सॉकर के वीडियो गेम में उनकी तस्वीर कवर पर ली गयी है और उनके खेलतर कार्यों में फुटबाल का खेल प्रोत्साहित करना शामिल है. अपने आभामंडल से उन्होंने साबित कर दिया कि भारत में क्रिकेट ही नहीं, फुटबाल का जादू भी चलता है.

प्रकाश हिन्दुस्तानी

(हिन्दुस्तान, ४ सितंबर २०११ को प्रकाशित)

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