
'शानदार' उतनी 'फैब्यूलस' नहीं है ! इसे 'भारत की पहली डेस्टिनेशन वेडिंग पिक्चर' कहा जा सकता है. ऊँची दुकान, फीके पकवान जैसी यह फिल्म शाहिद कपूर को 'सौ करोड़ क्लब' में शामिल कराएगी, इसमें शक है। 'फैक्टरी मेड इमोशंस' वाली यह फिल्म रोमांस और कॉमेडी का मिक्स्चर है. करन जौहर की दूसरी फिल्मों जैसी इस फ़िल्म में मसाले ही मसाले हैं! जैसे आप रेस्टोरेंट में जाकर दाल फ्राय आर्डर करो और उसमें मसाले ही मसाले हो, दाल गायब हो, वैसा ही शानदार देखते वक्त लगता है.-- ठूंसे हुए गाने, झमाझम सेट और भव्यतम लोकेशन ! इस फिल्म के डायरेक्टर विकास बहल हैं ! 'क्वीन' के उनके निर्देशन से आशा जागी थी। दशहरे पर रिलीज़ करके करके इस फिल्म बेहतर कारोबार की संभावनाओं को बढ़ा दिया गया है --'चार दिन का वीकेंड' शायद नैया पार करा देगा।

यह कपूरों की पिक्चर है -- शाहिद कपूर, उनकी बहन सना कपूर और दोनों के पिता और बेहतरीन अदाकार पंकज कपूर ! आलिया भट्ट फिल्म की केन्द्र है और इसमें शाहिद कपूर की केमेस्ट्री आलिया भट्ट के साथ वैसी ही है, जैसी 'जब वी मेट' में करीना के साथ थी। 1990 में आई मिथुन और मंदाकिनी की शानदार फिल्म से इसका कोई लेने देना नहीं है और यह कोई सिक्वल वगैरह नहीं है।

फिल्म में पंकज कपूर आलिया के पिता की भूमिका में हैं जो आलिया के पिता महेश भट्ट की तरह ही यह मानते हैं कि उनकी बेटी के लायक कोई पैदा ही नहीं हुआ। विदेश में फिल्माई, शादी के माहौल में परियों की कहानी के ऐसे दृश्य रचे गए हैं, जिसकी कल्पना टीन ऐज की जमात करती है। जो बच्चे मिल्स एंड बून से वंचित हैं, वे इसे पसंद करेंगे !
इस फिल्म में 29 मिनट 6 गानों गुजर जाते हैं। 1960 में बनी मुगले आज़म ब्लैक एंड व्हाइट फिल्म थी पर जब उसमें मधुबाला गाना थी, तब गाने रंगीन फिल्माए गए थे-- जब प्यार डरना क्या… , मोहे पनघट पर नंदलाल....; 'शानदार' का एक गाना ब्लैक व्हाइट में फ़िल्माया गया है --'शानदार' के शीर्षक गीत 'नजदीकियां' में शाहिद कपूर और आलिया भट्ट बॉलरूम डांस करते नजर आते हैं। यह दिलचस्प गाना है -- 'रायता फ़ैल गया' ( इसका दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल से कोई नाता नहीं है ); जिसकी दिलचस्प लाइन है -- 'गुलजार के गीतों में जब यो यो होनी सिंह घुस गया.. के रायता फैल गया'.
टीन ऐज दर्शकों के लिए छुट्टियों में यह फिल्म टाइम पास है !
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