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हेट स्टोरी-3 फिल्म ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया - यह सोचने पर कि मैं यह फिल्म देखने ही क्यों आया?

ऐसी फिल्म की क्या समीक्षा की जाए, जिसका मीडिया पार्टनर यौन शक्ति बढ़ाने वाला राजसी केप्सुल हो। गाने की लाइन तो देखिए- सर्दी में गर्मी है, बड़ी बेशर्मी है। एक और गाने की लाइन है- तेरी मां की- तेरी मां की बात क्यों सुनी? जिन लोगों ने हेट स्टोरी और हेट स्टोरी-2 नहीं देखी है, उन लोगों को यह फिल्म देखने की जरूरत नहीं, क्योंकि इस फिल्म का उससे कोई नाता नहीं है और जिन लोगों ने हेट स्टोरी देखी है, उन्हें भी यह देखने की कोई जरूरत नहीं है।

फिल्म रिलीज होने के पहले बहुत प्रचार किया गया था कि भारतीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के प्रमुख ‘पहले लाज’ निहलानी ने हेट स्टोरी को भी संस्कारी बनाने की कोशिश की है। प्रचार झूठा निकला क्योंकि इसमें संस्कारी बनाने लायक कुछ है ही नहीं।

इस फिल्म में संपत्ति के लिए भाइयों की खानदानी दुश्मनी, दोस्त का बलिदान, बदले की आग, मारपीट के घटिया सीन, बेडरूम और स्वीमिंग पूल के सीन, डुप्लीकेट गानों की भरमार और जबरदस्ती गुंथी गई कहानी है। टी-सीरिज ने सिंगल स्क्रीन थिएटर के पुराने मूंगफली छाप दर्शकों के लिए फिल्म बनाई है।

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