
सनी देओल बुड्ढे हो गए हैं इसका एहसास उन्हें हो चुका है। इसीलिए घायल वन्स अगेन में उन्होंने ढाई किलो वाले हाथ के बजाय एक्शन और ग्रैफिक्स का सहारा ज्यादा लिया। एक्शन के लिए उन्होंने हॉलीवुड के उस एक्शन को-आर्डिनेटर डॉन ब्रेडली को बुलाया, जिन्होंने अर्नाल्ड श्वार्जनेगर की फिल्म ट्रू लाइज के एक्शन सीन डायरेक्ट किए थे। घायल वन्स अगेन में भी वैसी ही कलाकारी देखने को मिलती है। असल में एक्शन ही इस फिल्म की नैया पार कराएगी।

घायल वन्स अगेन की कहानी में कुछ भी नयापन नहीं है। 1990 में बनी घायल सुपरहिट हुई थी। उसी की कहानी को आगे बढ़ाया गया है। चौदह साल की जेल काटकर सनी देओल वापस आते हैं। न्यूरोलॉजिस्ट सोहा अली खान उन्हें मानसिक बीमारियों से बचाती हैं और उनके अभियान में जुट जाती हैं। हीरो मीडिया से जुड़ जाता है और अन्याय के खिलाफ अभियान चलाता हैं। घायल में उसकी दुश्मनी गुंडे, मवाली टाइप के लोगों से होती है, इसमें संघर्ष कार्पोरेट हाउस और राजनीति के शीर्ष लोगों से होता है। सनी देओल ने एक्शन के बहुत से सीन खुद करने के बजाय नए कलाकारों से करवाए है, जिससे फिल्म की विश्वसनीयता थोड़ी बढ़ जाती है।

नए जमाने के हिसाब से कहानी में बदलाव किए गए हैं, लेकिन नायक और खलनायक की प्रवृत्ति नहीं बदलती। नायक न्याय के लिए लड़ता है और खलनायक गलत तरीकों से कारोबार करते हुए अपना वर्चस्व बनाए रखना चाहते हैं। फिल्म का एक डायलॉग है कि अगर करप्ट आदमी मरता है, तो उसकी साम्राज्य मर जाता है, लेकिन अगर ईमानदार मरता है, तो उसका साम्राज्य बढ़ना शुरू हो जाता हैं।
फिल्म के जबरदस्त एक्शन के सामने अभिनय, गीत और संवाद फीके लगते है। मुंबई के मॉल में भागने और छुपने के दृश्य, मुंबई की लोकल ट्रेन में फाइटिंग, कारों की रेस, छुपने और भागने का खेल, बेहद रोमांचक तरीके से दिखाया गया हैं। ट्रू लाइज की तरह गगनचुंबी इमारत के पास हेलीकॉप्टर से किए गए स्टंट भी दिल को दहला देने वाले हैं।
एक्शन के शौकीन लोगों को फिल्म पसंद आएगी। बाकी लोगों के लिए फिल्म टाइमपास है।
Friday
05 Feb. 2016
02.15 PM