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इंजीनियर का बेटा इंजीनियर बनता है और डॉक्टर का बेटा डॉक्टर। ऐसे में काम वाली बाई की बेटी क्या बन सकती है? बनेगी तो वह भी काम वाली बाई ही। यह विचार था काम वाली बाई की बेटी का, लेकिन काम वाली बाई है, जो इसे मानने से इनकार करती है। वह चाहती है कि उसकी बेटी भी पढ़ लिख कर अच्छी जिंदगी जिए। अपनी बेटी की पढ़ाई में वह कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती, लेकिन बेटी है जो पढ़ाई से ज्यादा टीवी देखने में ध्यान देती है। पढ़ाई में उसका मन नहीं लगता और गणित में तो निल बटा सन्नाटा। मां को इसकी चिंता होती है, तो वह मोहल्ले की डॉक्टरनी से बात करती है, जिसके यहां वह साफ-सफाई करने जाया करती है। डॉक्टरनी कहती है कि तुम पढ़ा दो उसे। काम वाली कहती है कि मैं कहां गणित जानती हूं। डॉक्टरनी का जवाब होता है कि तुम भी सीख लो और वह उसे स्कूल में भर्ती करने के लिए प्रेरित करती है। अब मां-बेटी दोनों एक ही कक्षा में पढ़ती हैं। शर्म के मारे बेटी अपनी सहपाठियों से यह बात छुपाती है कि उसकी मां भी उसी क्लास में है।

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नरेन्द्र मोदी कहते हैं बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ। यह फिल्म वास्तव में एक ऐसी मां की कहानी है, जो अपना पेट काटकर अपनी बेटी के लिए सपने बुनती है और उसे पूरा करने के लिए जी जान लगा देती है। इस फिल्म के निर्माण में अमिताभ बच्चन और आमिर खान ने भी काफी सहयोग किया है। फिल्म की कहानी ही कुछ ऐसी है, जो हर किसी के दिल को छू लेती हैं।

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इस फिल्म को उत्तरप्रदेश और दिल्ली में टैक्स फ्री कर दिया गया है। इसकी कहानी आगरा की पिछड़ी बस्ती में रहने वाले परिवार की है। यह पूरी फिल्म हिन्दी भाषी समाज के लोगों की कहानी कहती है। इसके कलाकार खुशमिजाज हैं। पिछड़ी बस्ती के नाम पर फिजूल की गंदगी नहीं ठूंसी गई है। संगीत दिलकश है। कलाकारों का अभिनय भी शानदार है।

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स्वरा भास्कर ने तनुु वेड्स मनु में कंगना रनौत की सहेली और प्रेम रतन धन पायो में राजकुमारी का रोल किया था। इस फिल्म में उन्होंने एक पन्द्रह साल की बेटी की मां की भूमिका की है और बड़ी मेहनत करके रोल को जीवंत किया है। चाहे वह क्लास रूम के दृश्य हो या बेटी के साथ मन की बात करने के। स्वरा भास्कर ने बता दिया कि वे स्टार भले ही न हो, पर कलाकार जबरदस्त है। पंकज त्रिपाठी ने सहजता से स्कूल के प्राचार्य का रोल किया है और रत्ना पाठक शाह ने डॉक्टरनी को साकार किया। स्वरा भास्कर की बेटी बनी रिया शुक्ला स्वाभाविक लगी। इस फिल्म का तमिल रीमेक भी साथ ही रिलीज हुआ है, जिसका नाम अम्मा कणक्कु रखा गया है। फिल्म की निर्देशक अश्विनी अय्यर तिवारी है। लगभग पौने दो घंटे की यह फिल्म नए सिनेमा का प्रतिनिधित्व करती है।

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