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उस दिन भी शुक्रवार था। तारीख 12, महीना मार्च का और साल 1993. दोपहर करीब सवा बजे हमारे वीटी ऑफिस के सामने से एक के बाद एक, लगातार कई दमकलें सायरन बजाते हुए फ़्लोरा फाउंटेन की तरफ़ दौड़ी जा रही थीं। मैं अपने सहकर्मी पत्रकार सुमंत मिश्र के साथ भयपूर्ण उत्सुकता के साथ उस दिशा में पैदल ही लगभग दौड़ते हुए पहुंचा तो पाया कि स्टॉक एक्सचेंज में बहुत प्रभावशाली बम विस्फोट हुआ है। वहां खून ही खून और जख्मी लोगों और शवों को देख रिपोर्ट करने अपने अखबार नवभारत टाइम्स के दफ़्तर आए और अपने प्रधान सम्पादक श्री विश्वनाथ सचदेव को पूरा किस्सा बताने उनके केबिन में पहुंचे। हमें घबराया सा देखकर उन्होंने पहले तो बैठने का कहा और फिर पानी पिलवाने के बाद बताया कि और भी करीब दर्ज़न स्थानों पर बम धमाके हुए हैं और यह कोई बड़ी आतंकी साजिश है।

तब मोबाइल व इंटरनेट का ऐसा वजूद था नहीं; न प्राइवेट न्यूज़ चैनल थे, न एफ़एम रेडियो। हम टेलीप्रिंटर कक्ष में बम धमाकों के समाचार देख देख कर उत्तेजना और डर महसूस कर रहे थे, क्योंकि तीन-चार महीने पहले भारी सांप्रदायिक उन्माद हम देख चुके थे। उधर टेलीप्रिंटर बम धमाकों खबरें उगलते जा रहे थे :

*बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज - बम ब्लॉस्ट 13.30 बजे - 84 मृत

* कालबादेवी - बम ब्लॉस्ट 14.15 बजे - 5 मृत

* शिव सेना भवन - बम ब्लॉस्ट 14.30 बजे - 4 मृत

* एयर इंडिया बिल्डिंग, नरीमन पॉइंट - बम ब्लॉस्ट 14.33 बजे - 20 मृत

* मच्छीमार कॉलोनी, माहिम - बम ब्लॉस्ट 14.45 बजे - 3 मृत

* वर्ली सेंचुरी बाज़ार - बम ब्लॉस्ट 14.45 बजे - 113 मृत

* ज़वेरी बाज़ार - बम ब्लॉस्ट 15.00 पीयेम - 17 मृत

* होटल सी रॉक (वर्तमान में होटल ताज लैंड्स एंड ), बांद्रा - बम ब्लॉस्ट 15.10 बजे -

* प्लाज़ा सिनेमा , दादर - बम ब्लॉस्ट 15.15 बजे - 10 मृत

* होटल जुहू सेंटोर (वर्तमान होटल ट्यूलिप स्टार) - बम ब्लॉस्ट 15.20 बजे - 3 जख्मी

* सहार एयरपोर्ट के समीप - बम ब्लॉस्ट 15.30 बजे

* होटल एयरपोर्ट सेंटोर (वर्तमान में होटल सहारा स्टार) - बम धमाका 15.40 बजे - 2 मृत

* पासपोर्ट कार्यालय, वर्ली

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सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बम ब्लॉस्ट में 317 जानें गईं और करीब 1400 लोग ज़ख़्मी हुए थे। करोड़ों की संपत्ति की क्षति भी हुई। षड्यंत्रकारी दहशतगर्दों ने मुंबई की हर उस जगह निशाना बनाया था, जिससे मुंबई की पहचान दुनियाभर में होती रही है। शेयर बाज़ार, पब्लिक ट्रांसपोर्ट केंद्र, भीड़भरे बाजार, प्रमुख होटल, एयरपोर्ट जैसी जगहें खास निशाने पर थीं. इसी दिन न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर भी बम ब्लॉस्ट किये गए थे, पर वहां कोई जनहानि नहीं हुई थी। अधिकांश बम कार या स्कूटर में लगाए गए थे । होटल में, सूटकेस बम कमरे में छोड़ दिया गया। यह करतूत पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की थी और उसमें दाऊद इब्राहिम, टाइगर मेमन, अयूब मेमन और याकूब मेमन सहित उसके अंडरवर्ल्ड सहयोगियों ने मदद की थी।

मुम्बईकर लोगों के ज़ज्बे को सलाम ! इस भीषण हमले के बाद मुंबई महानगरी फिर दुगुने जोश के साथ खड़ी है और जख़्मों के बावजूद दुनिया को अमन का पैगाम दे रही है।
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संजय दत्त ,बम ब्लॉस्ट , द डेली में बलजीत परमार की ब्रेकिंग न्यूज़

इन सीरियल बम ब्लॉस्ट में ही संजय दत्त को दोषी ठहराया गया और अवैध हथियार रखने के लिए 5 साल जेल की सजा सुनाई गई। संजय दत्त को कथित तौर पर दाऊद इब्राहिम के गिरोह द्वारा एके 56 और गोलियों की आपूर्ति की गई। कहा गया कि बम विस्फोट के बाद संभावित सांप्रदायिक दंगों के दौरान सुरक्षा के लिए संजय दत्त ने ये हथियार लिए थे। संजय दत्त के पास से कोई हथियार ज़ब्त नहीं हुआ था क्योंकि वह नष्ट किया जा चुका था। संजय को यह सजा उनके द्वारा कुबूलनामे के कारण हुई है।

इस मामले में संजय दत्त की खबर सबसे पहले 'द डेली' अखबार के क्राइम रिपोर्टर बलजीत परमार ने ब्रेक की थी। 15 अप्रैल 1993 को जब यह खबर ब्रेक की गई तब देश भर में सनसनी फ़ैल गई। उस दिन संजय दत्त मॉरिशस में 'आतिश' फिल्म की शूटिंग कर रहे थे. उनके पिता अभिनेता सुनील दत्त संसद सदस्य थे और उन्होंने ही संजय को भारत आने के लिए कहा था। सहार एयरपोर्ट से बाहर आते ही संजय को पुलिस ने पूछताछ हिरासत में ले लिया था. अभी वे पुणे की यरवदा जेल में हैं।

--प्रकाश हिन्दुस्तानी

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