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एक जुलाई की शाम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब डिजिटल इंडिया सप्ताह की शुरुआत कर रहे थे और इस बात का ऐलान भी कर रहे थे कि भारत में अगले पांच साल में 18 लाख नौकरियां बढ़ेंगी। जीडीपी 128 लाख करोड़ से बढ़कर १९२ लाख करोड़ होने की संभावना है। उसी कार्यक्रम में मुकेश अंबानी ढाई लाख करोड़ के निवेश की बात कर रहे थे। टाटा समूह के सायरस मिश्री 60 हजार नई नौकरियों का वादा कर रहे थे और यह कह रहे थे कि भारत चायनीज मोबाइल से भी सस्ते मोबाइल बनाकर एक लाख नई नौकरियां जनरेट करेगा, उसी वक्त मध्यप्रदेश के खण्डवा के पास एक बस दुर्घटना होती है और उसमें 25 लोगों की मौत हो जाती है।

डिजिटल इंडिया और बस दुर्घटना में कोई तारतम्य नहीं है। दिल झकझोर देने वाली जो सूचना है, वह यह कि बस में जो लोग मरे उनमें से अधिकांश बेहद निम्न आय वर्ग के लोग थे। ये वे लोग थे जो साधारण बसों में यात्रा कर रहे थे। इनके पास अपनी कारें नहीं थी। दिल दहलाने वाली खबर यह रही कि दुर्घटनास्थल पर मचे हाहाकार के बाद जब पुलिस ने मृतकों की शिनाख्त करने के लिए उनकी जेबें टटोली तो किसी की जेब में अस्पताल की पर्ची थी, किसी की जेब में नौकरी की पर्ची और एक व्यक्ति की जेब में रोटी। जिस देश में एक दिन के 4.50 लाख करोड़ के निवेश की बात होती हो, उसी देश में कोई व्यक्ति इतना मजबूर हो कि रोटी को जेब में रखकर घूमता हो। यह बात दिल को झकझोर देती है। 

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 आमतौर पर जेब में रोटी रखकर कोई नहीं घूमता। मजदूर लोग भी स्टील या प्लास्टिक के डिब्बे में खाना लेकर काम पर जाते हैं। जो आदमी जेब में रोटी लेकर घूम रहा हो उसे इस बात की तनिक भी आश्वस्ति नहीं होगी कि अगली रोटी उसे कब मिलेगी? यह रोटी उसके  लिए एक तरह का आश्वासन था, एक तरह का पूâड इंश्योरेंस भी। हो सकता है वह रोटी उसे किसी ने खाने के लिए दी हो या यह भी हो सकता है कि वह रोटी उसने किसी से मांगी हो और अपने बच्चों के लिए ले जा रहा हो। यह भी संभव है कि वह आदमी बस रुकने पर ढाबे से कचोरी, समोसा खरीदने की स्थिति में न हो। जिस आदमी के खीसे में पैसे हो, पर्स में डेबिट-व्रेâडिट कार्ड हो, वह रोटी लेकर इस तरह नहीं घूमता। 

हर रोज हम एक भारत में अनेक भारत के दर्शन करते है। भारत है ही इतना विशाल, लेकिन विशालता में यह विरोधाभास क्षुब्ध कर देने वाला है। प्रधानमंत्री ने दिल्ली में कहा था कि ई-गवर्नेंस से आगे बढ़कर हम एम-गवर्नेंस यानि मोबाइल गवर्नेंस की तरफ जाएंगे, जिससे देश में नए रोजगार जनरेट होंगे और तरक्की के नए अध्याय लिखे जा सवेंâगे। प्रधानमंत्री ने मोबाइल मनी से लेकर मोबाइल हेल्थ तक की बातें कहीं। काश कोई ऐसी ई-रोटी या एम-रोटी भी होती, जो मोबाइल पर भेजी जा सकती और भूखा आदमी पेट भर सकता।

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