
वे टाइम्स समूह के 'नभाटा' में पत्रकार थे. फ़िल्म पत्रकारिता करते, डॉक्युमेंट्री बनाते थे. ढाई दशक पहले यूएसए जा बसे. मूलत: बिहार के अशोक ओझा वहां हिन्दी के स्टार टॉक कार्यक्रम से जुड़कर हिन्दी के शिक्षण-प्रशिक्षण में जुट गए. अमेरिका में उन्होंने हिन्दी के प्रचार-प्रसार का काम शुरू किया. उनकी कोशिश थी कि भारतीय मूल के सभी लोग तो हिन्दी सीखें ही, अमेरिका के लोग भी हिन्दी सीखें क्योंकि अमेरिकी सरकार ने बिजनेस के लिए हिन्दी को 'क्रिटिकल लेंग्वेज' माना है.
वे अभी 'स्टार टॉक' से जुड़े हैं और न्यू यॉर्क / न्यू जर्सी क्षेत्र में हिन्दी पढ़ानेवाले शिक्षकों के प्रशिक्षण से जुड़े हैं. वे 'हिन्दी का अमेरिकी एनजीओ' चलाते हैं. उनकी कोशिशों के कारण एक प्रमुख बैंक ने अपने 'एटीएम' में हिन्दी भाषा को जोड़ा है. वे चाहते हैं कि कोक जैसे उत्पाद हिन्दी में भी तमाम सूचनाएं दें. न्यू यॉर्क का भारतीय प्रदूतावास, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, मप्र के मुख्यमंत्री उनके कार्यों को देख और सराह चुके हैं.

उनके प्रयासों से न्यू जर्सी की रटगर्स युनिवर्सिटी में 'हिन्दी केंद्र' की स्थापना हो चुकी है. वे इसी विश्वविद्यालय में 'ऑनरेरी विजिटिंग स्कॉलर' हैं.

न्यू जर्सी के अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन और भोपाल के विश्व हिन्दी सम्मेलनों में उनकी सक्रिय भागीदारी से मुझे कई बातें सीखने को मिलीं. संकीर्णता से दूर बिहार के अशोक जी की पत्नी गुजरात की हैं. दोनों न्यू यॉर्क के पास एडिसन में रहते हैं. उनकी इकलौती बेटी ने एक जर्मन युवक से शादी की है.