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टीआरपी बढ़ाने या प्रसार संख्या में इजाफा करने के इरादे से मीडिया में खबरें तेजी से प्रचारित-प्रसारित करने की होड़ लगी हुई है। इसमें सच्चाई की परख किए बिना समाचार देने की जल्दबाजी की जाती है। बाद में जब सच सामने आता है, तब भी भूल सुधार नहीं की जाती और न ही माफी मांगी जाती है। इससे मीडिया की विश्वसनीयता संकट में आती जा रही है। ऐसे कई उदाहरण पिछले दिनों देखने को मिले हैं।

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टाइम्स नाउ और इंडिया टुडे चैनलों पर यह बात प्रचारित-प्रसारित की गई कि महाराष्ट्र में भी शराब पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है। अभी महाराष्ट्र में शराब पीने के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष होना जरूरी है। मीडिया में इस तरह की खबरें भी थी कि महाराष्ट्र सरकार इस आयु को कम करने पर विचार कर रही है। बाद में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने इसका खंडन किया और महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री ने भी इसे गलत बताते हुए कहा कि इस पर कोई विचार नहीं किया जा रहा है। हमें लगता है कि महाराष्ट्र में शराब पीने की उम्र घटाने का फैसला बहुत नकारात्मक होगा, इसलिए हम इस पर विचार ही नहीं कर रहे है।

इसके पहले 26 नवंबर को मीडिया के एक वर्ग में यह खबर बड़े जोर-शोर से आई कि भारत सरकार ने भारत-पाक क्रिकेट सीरिज खेलने की अनुमति दे दी है। उस समाचार से देश में व्यापक गुस्से का इजहार हुआ। क्योंकि 26 नवंबर मुंबई हमलों के संदर्भ में बेहद नकारात्मक दिन माना जाता है। हरेक के मन में सवाल था कि जो पाकिस्तान भारत पर आतंकी हमला करता है, उसके साथ खेलने की अनुमति 26 नवंबर को ही क्यों दी गई?

भारत के एक बड़े वर्ग में अंग्रेजी दैनिक हिन्दू को गंभीरता से पढ़ने की परंपरा रही है। यह माना जाता है कि हिन्दू में छपी खबरें सही होती है, लेकिन 10 नवंबर 2015 को हिन्दू अखबार ने छापा कि बीजेपी और आरएसएस मिलकर गांधी जी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की मौत का दिन समारोहपूर्वक मनाएंगे। जबकि वास्तविकता यह थी कि आरएसएस और बीजेपी ने इस तरह के किसी आयोजन की घोषणा नहीं की थी। हिन्दू महासभा के कुछ लोगों ने नाथूराम गोडसे की मौत के दिन को (15 नवंबर) समारोहपूर्वक मनाने की कोशिश की। जबकि बीजेपी और आरएसएस ने उसकी कड़ी आलोचना की। हिन्दू ने यह खबर सीपीआई के एक नेता के हवाले से प्रकाशित की थी और इस अखबार ने इस बारे में न तो किसी बीजेपी नेता से प्रतिक्रिया पूछी और न ही आरएसएस के कार्यकर्ता से।

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया ने 28 नवंबर 2015 को खबर छापी थी, जिसमें केन्द्रीय गृह राज्य मंत्रालय किरण रिजिजू के हवाले से कहा गया था कि दक्षिण भारत के मुस्लिम आईएसआईएस के प्रति ज्यादा आकर्षित हो रहे है। जबकि रिजिजू ने यह कहा था कि हमें आईएसआईएस मुद्दे को किसी क्षेत्रीय नजरिये से नहीं देखना चाहिए। वास्तविकता यह है कि एक टीवी पत्रकार ने रिजिजू से यह सवाल पूछा था कि ऐसा क्यों है कि दक्षिण भारत के मुस्लिम आईएसआईएस के प्रति ज्यादा आकर्षित हो रहे है, उसी के जवाब में मंत्री ने कहा था कि हम इस मुद्दे को किसी क्षेत्र विशेष से जोड़कर अनावश्यक विवाद खड़े करना नहीं चाहते।

लगभग सभी अखबारों और चैनलों पर इस तरह की खबरें भी चली थी कि रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर रिटायर हो रहे है। इस तरह का समाचार मीडिया के सभी क्षेत्रों से आया था कि गोवा के एक कार्यक्रम में रक्षा मंत्री ने इशारा किया कि वे रिटायर हो रहे हैं। मीडिया में खबर आई कि रक्षा मंत्री ने कहा था कि 60 साल की उम्र के बाद सभी को रिटायर होने के बारे में सोचना चाहिए और बड़ी जिम्मेदारी भी नहीं लेनी चाहिए। इसके बाद रक्षा मंत्री को लेकर अफवाहों का बाजार गर्म रहा। बाद में रक्षा मंत्री को खुद ट्वीट करके अपनी सफाई देनी पड़ी। अपने ट्वीट में रक्षा मंत्री ने लिखा कि 60 साल की उम्र में जब आम लोग रिटायरमेंट के बारे में सोचते है, लेकिन मैंने ऐसे में बड़ी जिम्मेदारी ली और मैं सभी को आश्वस्त करता हूं कि मैं उसे बेहद जिम्मेदारी से निभाऊंगा।

ऐसी ही एक बात 15 नवंबर 2015 को अमित शाह के बारे में भी मीडिया में आई, जिसमें कहा गया था कि सभी नेताओं को 60 साल में रिटायर हो जाना चाहिए। इस बात को लोगों ने चटखारे लेकर छापा, क्योंकि प्रधानमंत्री खुद भी 60 साल से अधिक के हैं। बाद में अमित शाह ने इस बात का खंडन किया कि उन्होंने कभी भी ऐसी बात नहीं कही थी। अमित शाह ने इतनाभर कहा था कि आरएसएस के नेता नाना जी देशमुख चाहते थे कि 60 साल की उम्र में नेता भी रिटायर हो जाए।

आउटलुक पत्रिका में अपने एक लेख में राजनाथ सिंह का यह तथाकथित बयान छापा था कि- ‘‘मोदी 800 साल में भारत के पहले हिन्दू शासक हैं।’’ बाद में यह बात सामने आई कि राजनाथ सिंह ने कभी भी यह बात नहीं कही थी, बल्कि सीपीएम के नेता मोहम्मद सलीम ने यह आरोप लगाते हुए राजनाथ सिंह को कोट किया था कि राजनाथ सिंह ने ऐसा कोई बयान दिया है। जबकि वास्तविकता यह थी कि विश्व हिन्दू परिसर के नेता अशोक सिंघल ने करीब एक साल पहले इस तरह की बात कही थी।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने 30 नवंबर 2015 को गायक अभिजीत भट्टाचार्य का यह बयान प्रकाशित किया था, जिसमें आमिर खान पर ढोंगी होने का आरोप लगाया था। बाद में अभिजीत ने खुद ट्वीट करके इस खबर का खंडन किया और कहा कि उन्होंने सैफाली वैद्य के पत्र को शेयर किया था, न की कोई पत्र लिखा था। टाइम्स ऑफ इंडिया ने बाद मेंं अपनी गलती मान ली।

खबरें देने की जल्दबाजी में लगभग हर तरह का मीडिया हाउस ऐसी गलतियां किए जा रहा है। इनमें से कुछ खबरें तो दुर्भावनापूर्वक भी पैâलाई जाती है। जैसे 27 नवंबर 2015 की एक खबर मीडिया में आई कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संसद में झपकी लेते देखे गए, जबकि ऐसी कोई बात थी ही नहीं। प्रधानमंत्री कुछ दस्तावेजों को देखने के लिए १० सेवंâड तक सिर ऊंचे करके बैठे रहे और दूर से ऐसा लगा कि वे झपकी ले रहे हो। बाद में इसके लिए माफी भी मांगी गई।

आमतौर पर ऐसी खबरें आती है, लोग उन पर चर्चा भी करते है और बाद में पता चलता है कि वे खबरें झूठी है। खबरों की भीड़भाड़ में ऐसी खबरें कहां गुम हो जाती है, पता ही नहीं चलता।

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