
‘आलिन्द’ में टोनी शुक्ला की करीब सवा सौ रचनाएं संकलित है। इसी के साथ इसमें गद्यनुमा छोटी-छोटी रचनाएं भी है, जो पाठक के मूड को बदलने की क्षमता रखती है। ये कविताएं मुक्त छंद कविताएं है और इनकी भाषा आसान और आम पाठकों को समझमें आने वाली है। ज्ञान का बघार लगाने की कोशिश नहीं है। वैज्ञानिक शब्दावली में रक्त का संचय करने वाले छोटे से प्रकोष्ठ को आलिन्द कहते है। अर्थात ह्रदय का एक हिस्सा जिसका संबंध रक्त के प्रवाह से है। शरीर के इस हिस्से का मानव के प्राण से सीधा संबंध है। कवि का मानना है कि ये कविताएं आलिन्द की तरह उनके ह्रदय का एक अंश है।
इसकी भूमिका में बाल कवि बैरागी ने लिखा है कि संस्कृत शब्द आलिन्द का अर्थ है घर के सामने बना चौतरा या चबुतरा एक अर्थ यह भी है - सोने के लिए बनाया गया ऊंचा स्थान मालवी और मालवा में इसे ओटला कहते है। ऐसा लगता है मानो कवि वहां से पूरे समाज का मुजाहिरा ले रहा है। ये कविताएं कई रंगों की है और कई कविताएं सीधे ह्रदय को छू लेती है। कवि ने अपनी भूमिका में अनेक लोगों का आभार माना है, जिनमें बालकवि बैरागी, प्रदीप चौबे, सुरेन्द्र शर्मा, उमेश त्रिवेदी, डीएन बोस, रविन्द्र नारायण पहलवान, पुष्पा प्रधान आदि का जिक्र है।
कविताओं में जिन रूपकों का सहारा लिया गया, वे दिल को छू लेने वाले है, जैसे अम्मा के हाथ की बनी रोटी अगर जल भी जाए, तब भी कुरकुरी ही होती है। ओटला और मचान, सेव परमल, लम्ब्रेटा जैसी कई चीजों का जिक्र भी कविताओं में है, जो हमें एक समय विशेष में ले जाते है। कवि ने लिखा है कि जागते रहो की आवाज लगाने वाले मुर्दों की बस्ती में आवाज लगा रहे है। जिन्दगी आपसे सिर्फ थोड़ा चाहती है और थोड़ा पाने पर भी वह बहुत देना जानती है, सिर्फ थोड़े की तैयारी करो, बहुत सामने होगा। शब्द शीर्षक की कविता में लिखा है कि शब्द कवि निरर्थक नहीं होते, वे कम में ज्यादा प्रस्तुत करने की क्षमता रखते है। कबीर, रैदास, सूर इन्हीं शब्दों के अप्रतीप जादूगर थे। शब्द कभी-कभी निशब्द भी हो सकते है, ध्वनी विहिन भी हो सकते है और अबोले भी हो सकते है। इसलिए चुनिए उन शब्दों को जिनके माध्यम से लोग आपको चुन सकें।
एक छोटी सी रचना गंदगी के बारे में भी है, जो स्वच्छ भारत की ओर इशारा करती है, लेकिन यहां कवि ने जिसे गंदगी कहा है वह है - स्वार्थ, लोभ, माया, धन का पागलपन और लालच। देश में चल रहे टीकाकरण अभियान पर भी चुटकी ली गई है और गांधीजी के विचारों को याद किया गया है। कवि ने अपनी धर्मपत्नी को समर्पित कविता में लिखा है कि अर्थांगिनी आधे की द्योतक है, पर आप तो पूर्ण हैं। आपसे ही मेरा जीवन, परिवार, मेरा प्यार संपूर्ण है।
सोशल मीडिया के आगमन के बाद साहित्य में जो बदलाव आए है, वह इस संग्रह में साफ नजर आते है। संग्रह कहता है कि इसके कवि को दुनियादारी का अच्छा अनुभव है और वह उन अनुभवों का आपसे बांटना चाहता है। पुस्तक का मुद्रण आकर्षक है।
काव्य संग्रह : आलिन्द
रचनाकार : टोनी शुक्ला ‘आशीष’
प्रकाशक : तराशा प्रकाशन, इन्दौर
पृष्ठ संख्या : 160
कीमत : 560/- रुपए