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Pankh

‘मन के पंख’ अंजना सिंह सेंगर की पहली काव्यकृति है, जिसमें ग़ज़ल, गीत, दोहे, कुंडलियां छंद, ताटंक छंद, घनाक्षरी, सरसी छंद, आल्हा छंद, मुक्तक, मुक्त छंद कविताएं, आधुनिक कविताएं, हाईकू और क्षणिकाएं शामिल है। कवयित्री ने लिखा कि यूं तो मन बड़ा चंचल होता है, लेकिन अगर उसके पंखों को सही दिशा दी जाए, मन को साध लिया जाए, उसे एकाग्र कर लिया जाए, तो बड़े से बड़ा काम सिद्ध हो सकता है। मन के तार जोड़ने से ही भक्त भगवान का हो जाता हैं, वह हरि दर्शन कर लेता हैं और जीवन सार्थक हो जाता हैं।

इस काव्य संग्रह में अंजना सिंह सेंगर की नई और पुरानी सभी रचनाओं में से चुनिंदा रचनाएं शामिल हैं। छंदबद्ध कविताएं भी है और आधुनिक कविताएं भी। यह एक परिचयात्मक काव्य संग्रह है। इस संग्रह में नई कविता के उदाहरण हैं और गेय तथा छंदबद्ध रचनाओं के भी।

अध्ययन के दौरान आकाशवाणी ने बतौर वार्ताकार कार्य करने तथा बाद में शासकीय सेवा के दौरान उन्होंने जिस तरह के अनुभव और विचार अपनी डायरी में लिखे यह संग्रह उन सब का प्रतिनिधित्व करता है। काव्य संग्रह की कविताओं के विषय समसामयिक और वर्तमान परिवेश के हैं। कवयित्री ने जो चीजें देखी, जैसा महसूस किया, उसे काव्य में ढाल दिया।

कवयित्री ने सुंदर, सरल और सहज शब्दों का इस्तेमाल किया हैं। उन्होंने न तो कविता को क्लिष्ट बनाने की कोशिश की और न ही अपने ज्ञान को भावनाओं के ऊपर जाने दिया। संग्रह की कविताओं में धर्म, दर्शन, व्यवहार, भक्ति, श्रद्धा, आराधना, वीर रस और प्रेम के प्रतीकों का उपयोग किया है। संग्रह में शामिल 9 हाईकू और तीन क्षणिकाएं वर्तमान सामाजिक परिदृश्य को उकेरती है। रिटायरमेंट कविता, नौकरीपेशा परिवार की स्थिति का बयान करती है। अलग-अलग समय और मूड की कविताएं पाठकों को एक अलग एहसास कराती है। कुछ कविताएं समाज की स्थिति पर व्यंग्य करती है, तो कुछ कविताएं राजनीति और राजनीतिज्ञों पर कटाक्ष है। कुछ कविताओं में लड़कपन भी छलकता है।

आधुनिक और नई कविता के दौर में छंद बद्ध कविताएं लिखना आसान बात नहीं है। सामाजिक सरोकार के नाम पर गद्यनुमा रचनाएं अधिक सामने आ रही है। यह संग्रह आने के बाद अंजना सिंह सेंगर कवि सम्मेलनों में भी शिरकत करने लगी हैं। उनकी कविताओं से लगता है कि वे काव्य मंच पर सफल कवयित्री सिद्ध होंगी। चलते-चलते संग्रह की आखिरी क्षणिका को उद्घृत का मोह नहीं छोड़ पा रहा हूं :

मेरे पड़ौसी को नींद
नहीं आती है,
क्योंकि उसे
मेरी तरक्की
नहीं भाती है।

 

काव्य संग्रह : मन के पंख
रचनाकार : अंजना सिंह सेंगर
प्रकाशक : वनिका पब्लिकेशन्स, नई दिल्ली
पृष्ठ संख्या : 112
कीमत : 250/- रुपए

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