8 सिंतबर 1978 को नईदुनिया में प्रकाशित लेख

सरदार सरोवर बांध की डूब में आने वाले 44 हजार परिवारों के करीब एक लाख लोगों के सामने विस्थापन का खतरा मंडरा रहा है। 40 साल से वे इस खतरे की सुगबुगाहट सुन रहे थे, लेकिन अब डूब का समय करीब आता जा रहा है। 31 जुलाई तक निसरपुर भी इतिहास बन जाएगा। जिस तरह हरसूद नर्मदा के बांध की डूब में आया था, उसी तरह निसरपुर का भी नामो-निशान मिट जाने वाला है। निसरपुर के पास ही के 76 गांव भी डूब में आने वाले है।
महीनों से मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार इन लोगों के पुर्नस्थापन की बात कर रही थी, लेकिन अभी भी पुर्नवास की व्यवस्था पूरी तरह नहीं हो पाई है। सैकड़ों लोगों को अभी तक उचित मुआवजा नहीं मिला है। हजारों लोगों को वैकल्पिक जमीन उपलब्ध नहीं कराई गई है। पुर्नवास की व्यवस्था का दावा किया जा रहा है, लेकिन पुर्नवास स्थल पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
निसरपुर से पांच किलोमीटर दूर 300 परिवारों को विस्थापित किया गया है। जहां पहुंचने के लिए न तो ढंकी सड़क है, न ही स्कूल और अस्पताल की सुविधा। चार सौ हेक्टेयर में फैले पुर्नवास स्थल पर लोगों के घरों में पानी पहुंचाने की कोई व्यवस्था नहीं हुई। दो वॉटर टैंक बनाए गए है, लेकिन वहां से उपयोग के लिए पानी लेकर जाना आसान बात नहीं है, क्योंकि रास्ते के नाम पर उचित व्यवस्था नहीं है, जगह-जगह बबूल के पेड़ उग आए है। उबड़-खाबड़ रास्ते पर पानी लेकर जाना आसान बात नहीं है।
पुर्नवास की व्यवस्था देखने के लिए जो अधिकारी निरीक्षण के बहाने आते है, वे पुर्नवास स्थल तक जाते ही नहीं कुक्षी या बड़वानी के गेस्ट हाउस में खाना-पूरी करके लौट आते है। डूब से प्रभावित लोगों का कहना है कि अधिकारी डूब के इलाके का मनमाना सर्वे करते हैं। दूसरी तरफ बांध पर गेट बनाने का कार्य पहले ही पूरा हो चुका है और उसे बंद करके पूरा बांध भरने की तैयारी की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी इलाके में वर्षा मापी यंत्र तक नहीं है।
लोगों का कहना है कि एक ओर तो सरकार करोड़ों पौधे रोपने का अभियान चलाती है और दूसरी तरफ बांध क्षेत्र में आने वाले सौ-सौ साल पुराने पेड़ों की बली चढ़ा रही है। अधिकारी डूब प्रभावितों को विस्थापित होने के लिए अलग-अलग तरह के पैकेज का प्रस्ताव दे रहे है। जैसे कि लोगों को मकान बनाने के लिए प्लॉट दिए जाएंगे। प्रधानमंत्री कुटीर योजना में मकान बनाने के लिए एक लाख 80 हजार रुपए तक मिलेंगे और अगर दूसरी जगह जाते है, तो 60 हजार रुपए मिलेंगे। इसके अलावा 20 हजार रुपए राशन के लिए तथा पशुओं के लिए चारे और भूसे की व्यवस्था भी की जाएगी। सामान शिफ्ट करने के लिए पांच हजार रुपए और मछली पकड़कर जीवन यापन करने वाले मछुआरों को प्लॉट देने की बात भी कहीं जा रही है। इसके लिए अधिकारी लोगों से वचन पत्र भरवा रहे हैं, लेकिन नाम मात्र के विस्थापित होने वाले लोगों ने ही वचन पत्र भरे है।
नर्मदा घाटी विकास निगम के अधिकारियों का कहना है कि निसरपुर के विस्थापन की योजना पुरानी है और 17 साल पहले ही लोगों को बता दिया गया था कि उनका विस्थापन होना है। अनेक लोगों ने कोर्ट में केस दायर किए है, जिस कारण उनको मुआवजा नहीं मिल पाया है। कई लोगों ने विस्थापन राशि से अच्छे मकान बनाए है और बेहतर जीवन जी रहे है। बांध पूरा भरने के बाद देश के विकास में मदद मिलेगी और जीडीपी में सुधार होगा।