
'शोले' की तरह 'पद्मावात' फिल्म के डॉयलॉग चर्चित होंगे--क्योंकि इनमें चित्तौड़, मेवाड़, राजपूतों, सूर्यवंशियों और राजपूत-नारी की आन - बान - शान की बात कही गई है; जैसे --
"राजपूती कंगन में उतनी ही ताकत है जितनी राजपूती तलवार में..." --पद्मावती (दीपिका पादुकोण)
"चिंता को तलवार की नोक पे रखे, वो राजपूत...रेत की नाव लेकर समुंदर से शर्त लगाए, वो राजपूत...और जिसका सर कटे फिर भी धड़ दुश्मन से लड़ता रहे, वो राजपूत "-- राजा रतनसेन (शाहिद कपूर)
"कह दीजिए अपने सुल्तान से कि उनकी तलवार से ज्यादा लोहा हम सूर्यवंशी मेवाड़ियों के सीने में है..." --राजा रतनसेन ( शाहिद कपूर)
"असुरों का विनाश करने के लिए देवी को भी गढ़ से उतरना पड़ा था. चित्तौड़ के आंगन में एक और लड़ाई होगी जो न किसी ने देखी होगी न सुनी होगी. और वो लड़ाई हम क्षत्राणियां लड़ेंगी. और यही अलाउद्दीन के जीवन की सबसे बड़ी हार होगी." --पद्मावती ( दीपिका पादुकोण)
रिलीज होने के पहले ही 'पद्मावत' को अनेक कारणों से काफी लोकप्रियता मिल चुकी। ऐसे में लोग फिल्म देखने के लिए प्रेरित होंगे ही। एक तरफ फिल्म का विषय अपने आप में चर्चा का केन्द्र है, तो दूसरी ओर इस फिल्म का विरोध करने वालों ने इस फिल्म को और ज्यादा चर्चित बना दिया है। संजय लीला भंसारी की बाजीराव मस्तानी की ही तरह इस फिल्म में भी दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह की जोड़ी तो है, लेकिन रणवीर सिंह इसमें पद्मावती बनी दीपिका के प्रति इस कदर आसक्त है जो दीपिका के लिए खून की नदी बहाने तक को तैयार है। नकारात्मक रोल में रणवीर जैसा सशक्त अभिनेता का अभिनय देखना सभी चाहेंगे। साथ में शाहिद कपूर तो है ही।

शानदार सेट्स, वीएफएक्स, सिनेमाटोग्राफी, गाने, घूमर नृत्य, कास्ट्यूम आदि पद्मावत की खूबियां हैं। ऐसे में फिल्म की माउथ तो माउथ पब्लिसिटी तो होनी ही है। लोग हिंदी फिल्मों को कथानक, काम करनेवाले कलाकार, निर्देशक, गीत-संगीत, नृत्य आदि के लिए देखने जाते हैं. ये सब बातें मिलकर फिल्म को दर्शनीय बना देती हैं। इसमें रणवीर सिंह का विशेष मेकअप है, जो रिलीज के पहले ही चर्चा में आ गया है।
फिल्म का प्रचार इतने परफेक्ट तरीके से किया गया है कि हर दर्शक तक यह सन्देश पहुँच ही चुका है कि इस फिल्म में मनोरंजन का ख़ास ध्यान रखा गया है।
पद्मावत भव्य फिल्म है और भारतीय दर्शक इसे पसंद करता है. यह पारिवारिक फिल्म है, पूरे परिवार के साथ इसे देखा जा सकता है. इसका अर्थ थे थियेटर में ज्यादा भीड़।

लंबा वीकेंड और छुट्टी का अवसर इस फिल्म को हिट कराने में सबसे ज्यादा मदद करेगा। शुक्रवार की जगह गुरुवार को ही फिल्म रिलीज होनेवाली है. शुक्रवार को गणतंत्र दिवस का अनिवार्य अवकाश है, यानी अत्यावश्यक सेवाओं को छोड़कर स्कूल, कॉलेज, कार्यालय, कारखाने सभी बंद रहेंगे। लोग परिवार के साथ घर से बाहर जाना चाहेंगे और उन्हें फिल्म देखने का वक़्त होगा। कई कार्यालयों में पांच दिन कार्य का सप्ताह होता है, वहां शनिवार की छुट्टी होती है, इस तरह यह वीकेंड ख़ास लम्बा हो जायेगा।
कोई दूसरी प्रमुख फिल्म पद्मावत के साथ रिलीज नहीं होना भी पद्मावत का प्लस पॉइंट है। फिल्म देखना चाहें तो कोई विकल्प है ही नहीं. फिल्म का हिट या सुपर हिट होना उसकी कमाई पर निर्भर होता है। पद्मावत के टिकिट की दर बढ़ा दी गई है, लगभग डेढ़ गुनी। इसका अर्थ है कि सामान्य से डेढ़ गुना ज़्यादा आय तो यूं ही हो जाएगी।