
कश्मीर में बुरहान वानी और उसके जैसे सैकड़ों युवाओं ने सोशल मीडिया को आतंक का औजार बना लिया था। शायद इसीलिए वहां मोबाइल और इंटरनेट सेवा ठप करनी पड़ी। बुरहान वानी की मुठभेड़ में मौत के बाद सोशल मीडिया का उपयोग आतंकी समूहों ने जमकर किया। विरोध प्रदर्शनों के दौर में हिंसक झड़पों से मुकाबला करते सशस्त्र बल के जवानों के हाथों ढाई दर्जन से अधिक मौतें हुई है। सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हुए है। कफ्र्यू के कारण उन घायलों के परिजनों को काफी परेशानी उठानी पड़ी।
रमजान के बाद कश्मीर में शादियों का मौसम पूरे शबाब पर होता है। दुर्भाग्यवश सैकड़ों शादियां स्थगित करनी पड़ीं। कई नौजवान सेहरा बंधवाए बिना ही मौत के शिकार हो गए और कई सेहरे की जगह शरीर पर पट्टियां बंधवाए अस्पताल में भर्ती हैं। कश्मीर के अखबारों में इन शादियों के स्थगन की सूचनाएं धड़ल्ले से छप रही हैं। कश्मीर के अखबारों के शीर्षक उस तरह के नहीं है, जिस तरह के दिल्ली या मुंबई के अखबारों में होते है। बेहद संवेदनशील तरीके से वहां के अखबारों में कश्मीर के खून से लथपथ होने की खबरें प्रकाशित की है। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की अपीलों का भी कोई विशेष असर नजर नहीं आ रहा और अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले तीर्थ यात्रियों के साथ अभद्रता और मारपीट की खबरों के साथ ही इस तरह की खबरें भी आ रही है कि पाक समर्थक गुटों ने तीर्थ यात्रियों के जत्थे को घेरकर उनसे पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगवाने जैसे काम भी किए।
इन बुरी खबरों के बीच अच्छी खबरें भी हैं, जैसे अमरनाथ जा रहे यात्रियों की बस दुर्घटनाग्रस्त होने पर लोग कफ्र्यू तोड़कर मदद के लिए बाहर आए। उन लोगों ने धर्म की परवाह नहीं की। कश्मीर के अस्पतालों में भर्ती घायलों की मदद करने वालों में भी सभी धर्मों के लोग शामिल है। सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के बावजूद सैकड़ों लोग रक्त दान संबंधी अपीलें करने में कामयाब रहे। इंटरनेट पर रोक के बावजूद वे लोग अपना संदेश किसी तरह सोशल मीडिया पर दे पाए। हिन्दू और मुसलमानों के बीच भाईचारे और मोहब्बत की खबरें भी अखबारों में छप रही है।
ट्विटर पर अजीत डोवाल इस तरह का संदेश दे रहे है कि हम कश्मीर के हालात को लेकर आश्वस्त है और समाधान ढूंढने में सक्षम है। शनिवार से कश्मीर के कई स्थानों पर कफ्र्यू में लंबी ढील देने या कफ्र्यू खत्म करने के निर्णय लिए जा चुके है। सोशल मीडिया पर प्रकाशित संदेशों के अनुसार कश्मीर में पिछले चार दिनों में झड़प की ५०० से ज्यादा वारदातें हुई। इनमें करीब १४०० से अधिक लोगों के घायल होने की खबरें भी आ रही है। कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग भी की है और कुछ लोगों ने संवेदनशील तरीके से लिखा है कि अगर शरीर के किसी हिस्से में घाव हो जाए, तो पहले उस पर मरहम लगाया जाना चाहिए।

कश्मीर को लेकर लोगों के मन में जो उन्माद है, वह भी किसी न किसी रूप में सोशल मीडिया पर नजर आ ही रहा है। पाकिस्तान की ओर से सरताज अजीज भी ट्विटर के मैदान में हैं और ट्वीट कर रहे है कि कश्मीर के रुख पर पाकिस्तान कभी भी पीछे नहीं हटेगा। हिना रब्बानी खार ने ट्विटर पर लिखा कि पाकिस्तान कभी भी युद्ध के जरिये कश्मीर हासिल नहीं कर सकता। सरताज अजीज और हिना रब्बानी के ट्वीट इस मामले में पाकिस्तान का रवैया बताने के लिए काफी है।
सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की आलोचना करने वाले पोस्ट सैकड़ों की संख्या में है, लेकिन ऐसे पोस्ट भी है, जिसमें भारत सरकार के रवैये की प्रशंसा की गई है। अजीत डोवाल का एक दिन पहले भारत आना, गृह मंत्री का अपना अमेरिका दौरा रद्द करना और शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर की यात्रा करना कुछ ऐसे मामले है, जिस पर लोगों ने संजीदगी से सकारात्मक बातें लिखी है। अनेक लोगों ने जम्मू-कश्मीर के स्थानीय अखबारों के इंटरनेट एडिशन का महत्व बताया है और लिखा है कि स्थानीय अखबार कश्मीर की स्थिति अच्छी तरह से बताने में सक्षम है। कश्मीर में हिंसा की खबरों के साथ ही कई पत्रकार सोशल मीडिया पर अचानक सक्रिय हो गए है। इनमें से अनेक लोगों का उद्देश्य प्रधानमंत्री को कटघरे में खड़ा करना है।