
प्रोफेसर अनिल गुप्ता पढ़े-लिखे दशरथ मांझी है. जी हाँ, आईआईएम अहमदाबाद के प्रोफेसर अनिल गुप्ता की तुलना किसी से हो सकती है, तो दशरथ मांझी से. दशरथ मांझी अगर पढ़े-लिखे होते, तो प्रो. अनिल गुप्ता की तरह ही होते. दूरदृष्टा, जिद्दी, खब्ती, अड़ियल, धुनी - व्यापक हित में काम करने वाले.


थ्री इडियटस् फिल्म में रेंचो (आमिर खान) ने जिस स्कूटर वाली आटा चक्की को दिखाया था, उस आटा चक्की के पीछे प्रोफेसर अनिल गुप्ता और उनकी संस्था ही थी. साइकिल से चलनेवाली ड्रिलिंग मशीन, मोटर साइकिल का ट्रेक्टर, कपास इकठ्ठा करनेवाला हार्वेस्टर, साइकिल से चलनेवाली वाशिंग मशीन, सीढ़ियां उतारनेवाली व्हीलचेयर, मोटरसाइकिल से चलने वाला सिंचाई पम्प, गैस से गरम होनेवाली कपड़ों की इस्तरी, नारियल व सुपारी के पेड़ पर चढ़ाने वाला ट्री क्लाइम्बर, 'बिना टंकी का' केरोसिन स्टोव, 30 प्रतिशत ज्यादा जलनेवाला स्टोव और ग्रामीणों के काम आनेवाली हजारों खोजों को उन्होंने पहचान दी, धन भी मुहैया कराया और हजारों जिंदगियां बदल दीं.



प्रोफेसर अनिल गुप्ता कृषि अनुसंधान तकनीक के विशेषज्ञ हैं. वे जानते है कि भारत के लोगों में गजब की कल्पनाशीलता और बुद्धि है. बरसों से वे इनोवेशन प्रोत्साहन अभियान में जुटे हैं. हिन्दी में इसे नवाचार कहा जाता है, बोलचाल की भाषा में जुगाड़. ये इनोवेशन कोई बहुत बड़े वैज्ञानिक नहीं करते, बल्कि गांवों और कस्बों में रहने वाले साधारण लोग करते है. महिलाएं और बच्चे भी नई-नई खोज करते रहते है. प्रोफेसर गुप्ता और उनकी टीमों ने भारतीयों के ऐसे 25 हजार इनोवेशन खोजे है. मुझे भी उनके साथ काम करने का मौका मुझे भी मिला था, पर मेरी पत्रकारिता की नौकरी के कारण वह साथ छोटा रहा.


प्रो. गुप्ता 17 साल से हर साल गाँवों में पैदल शोध-यात्रा करते हैं और अब तक करीब 7000 किलोमीटर पदयात्रा कर चुके हैं. वे डॉ. एपीजे कलाम के साथ काम कर चुके हैं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी उनके मुरीद हैं. उन्हें हजारों सम्मान और पुरस्कार मिल चुके हैं, पद्धश्री (2004) भी.


प्रोफ़ेसर अनिल गुप्ता के काम के बारे में और जानना हो तो इन वेबसाइट को देख सकते हैं :
प्रो. अनिल गुप्ता के TED TALK शो
https://www.youtube.com/watch?v=JHk9YVjhk7c (2010)
https://www.ted.com/talks/anil_gupta_india_s_hidden_hotbeds_of_invention (2009)anil5anil8