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शाहरुख खान को ‘बॉलीवुड का बादशाह’, ‘किंग खान’, ‘रोमांस किंग’ और ‘किंग ऑफ बॉलीवुड’ के नामों से पुकारा जाता है। फैन के बाद उन्हें ‘किंग ऑफ पकाऊराम’ के नाम से भी जाना जा सकता है। फैन उनकी पिछली फिल्म दिलवाले से भी ज्यादा पकाऊ है। फैन जैसी स्टुपिड फिल्म बनाने के बाद ऐसा लगता है कि शाहरुख खान को अपने अलावा और कुछ नजर नहीं आता। इस फिल्म में तो शाहरुख खान का डबल रोल है, इसलिए पर्दे पर केवल शाहरुख खान ही नजर आता है। अब इस बुढ़ऊ हीरो को ढाई घंटे कैसे झेले? उन्हें वो ही झेल सकता है, जो उनका अंधभक्त हो।

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फैन में जिसे सुपरस्टार का फैन बताया गया है, वह फैन नहीं बल्कि साइको फैन रहता है। अब वह साइको फैन जो हरकतें करता है, उसे थ्रिलर का नाम दे दिया है। यह तो शाहरुख खान का फिल्म दर्शकों पर कर्ज है कि इस फिल्म में उन्होंने गाने नहीं ठूंसे, वरना पता नहीं, कितने दर्शक आत्महत्या को मजबूर हो जाते। बकवास कहानी, औसत अभिनय और रबड़ की तरह खिंचती चली जाने वाली फिल्म। मुंबई, दिल्ली, लंदन और क्रोएशिया की लोकेशन्स अच्छी है। पहले यह फिल्म फरवरी में रिलीज होने वाली थी, लेकिन हैप्पी न्यू ईयर के दौरान शाहरुख खान के जख्मी हो जाने से इसमें देरी हुई। इंटरवल तक तो जैसे-तैसे इसे झेला जा सकता है पर उसके बाद मुश्किल हो जाती है।

इस फिल्म का प्रचार बड़े जोरदार तरीके से किया गया है, जिससे कुछ उम्मीद बंध रही थी, लेकिन यह बात सही है कि हर चमकती हुई चीज सोना नहीं होती। सुपरस्टार शाहरुख खान इस फिल्म में सुपरस्टार आर्यन खन्ना बने है। शाहरुख खान ने ही इसमें आर्यन खन्ना के एक फैन गौरव चानना का रोल किया है। हॉलीवुड के ग्रेग केनम ने थ्रीडी स्केनिंग का कमाल दिखाया है और शाहरुख खान के फैन के रूप में पच्चीस साल के शाहरुख खान को भी पेश किया है।

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यह हमशक्ल युवा (साइको) फैन शाहरुख से नाराज होकर आपराधिक हरकतें करता है। यहां तक कि वह शाहरुख खान के घर में घुस जाता है और उनके बेडरूम तक पहुंच जाता है। बात पचती नहीं। यह बात भी नहीं पचती कि सुपरस्टार अपने पागल फैन से निपटने के लिए खुुद ही एक्शन करने पर उतारू हो जाता है। सुपरस्टार को न तो पुलिस पर भरोसा रहता है, न ही मीडिया पर। अपने पूरे स्टाफ को वह नाकारा समझता है। फिर ऐसी-ऐसी हरकतें करता है, जो शायद ही कोई सुुपरस्टार तो क्या, जूनियर आर्टिस्ट भी नहीं करता होगा।

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शाहरुख खान को भ्रम है कि अभी भी उनके ऐसे फैन है, जिनके जीवन का एकमात्र मकसद अपने प्रिय सुपरस्टार से पांच मिनिट बात कर लेना भर है। ऐसे फैन के मां-बाप भी एकदम टेपे हैं। वे अपने बेटे की ऊल-जलूूल हरकतों पर भी उसका साथ देते है। अंत में उन्हें अक्ल आती है, लेकिन फैन को कभी अक्ल नहीं आती। ऐसे फैन की दिवानगी समझ में आती है, अगर सुपरस्टार कोई अभिनेत्री होती। साइबर कैफे चलाने वाला आर्यन खन्ना का फैन सुपरस्टार की उपेक्षा से तंग आकर उसी का दुश्मन बन जाता है। कहानी फिर जिन मोड़ों से गुजरती है, वहां उसकी विश्वसनीयता बहुत कम लगती है और कहीं पर तो वो हास्यास्पद भी हो जाती है। दर्शक बड़ी मुश्किल से अपने आप को फिल्म से कनेक्ट कर पाते है। अपने फैन को चेस करने के सुुपरस्टार के सिक्वेंस बोर करते हैं।

फैन शाहरुख खान के फैन लोगों को भी बड़ी मुश्किल से पसंद आएगी।

 

15 April 2016 : 2.50 PM

 

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