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लेखक और निर्देशक अभिषेक शर्मा की दाद देनी पड़ेगी कि उन्होंने एक घटिया से विषय को लेकर फिल्म बनाने की सोची, वह भी सीक्वल। उससे बड़ी दाद देनी पड़ेगी पूजा और आरती शेट्टी बहनों को, जिन्होंने फिल्म प्रोड्यूस की। कलाकार मनीष पॉल, पीयूष मिश्रा, प्रद्युमन सिंह, सिकंदर खेर, मियां उयेदा आदि भी इस फिल्म से जुड़े हैं, उन्हें भी मानना पड़ेगा। इसलिए मानना पड़ेगा कि जिस फिल्म को देखने में आप पक जाते हैं, उसे बनाने में ये लोग नहीं पके। पूरी तरह से पैसे और समय की बर्बादी है यह फिल्म। यह राष्ट्रीय संसाधनों का दुरुपयोग है।

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छह साल पहले 2010 में करीब छह करोड़ की लागत से बनी बकवास फिल्म तेरे बिन लादेन ने 15 करोड़ क्या कमा लिए निर्माता, निर्देशकों का दिमाग आसमान पर पहुंच गया। सीक्वल बना डाला। जिन्होंने पुरानी फिल्म देखी है, वे कहते है कि यह तो उससे भी गई बीती है। निर्माता-निर्देशक कहते है कि यह कॉमेडी फिल्म है, इसमें लादेन, अमेरिकी राष्ट्रपति, अमेरिकी सेना, हॉलीवुड, बॉलीवुड आदि सबका मजाक उड़ाया गया है। दर्शकों को लगता है कि वास्तव में मजाक तो उनका उड़ाया जा रहा है। बे सिर-पैर की कहानी (अगर आप उसे कहानी माने तो) बे सिर-पैर के संवाद और मुर्खतापूर्ण फिल्मांकन। कॉमेडी के नाम पर कुछ भी झेलना संभव नहीं है।

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पीयूष मिश्रा को बुद्धिमान मानने का भ्रम दूर हो गया। मनीष पॉल, सिकंदर खेर, सुगंधा गर्ग आदि फिजूल खर्च हो गए। अली जफर की औकात भी समझ में आ गई। फिल्म में निरंतरता नाम की कोई चीज है ही नहीं। गंभीर विषय की कमजोर कहानी और कमजोर प्रस्तुति। ऐसा कोई कारण नहीं है कि यह फिल्म देखी जानी चाहिए।

 

अजीब लोग हैं, 'तेरे बिन लादेन' का ही सीक्वल बना मारा.


अरे भाई, 'पीके' का सीक्वल नहीं बना, 'थ्री इडियट्स' का नहीं बना, 'चक दे इण्डिया' का नहीं बना, 'लगान' का नहीं बना, 'पाकीज़ा' का सीक्वल नहीं बना, 'मुग़ले आज़म' का नहीं बना, 'वक़्त' का नहीं बना, 'महल' का नहीं बना, 'बरसात' का नहीं बना, 'हम दोनों' का नहीं बना, 'श्री 420' का नहीं बना, 'साहिब बीवी और गुलाम' का नहीं बना, 'बंदिनी' का नहीं बना, 'कागज़ के फूल' का नहीं बना, 'प्यासा' का नहीं बना, 'आवारा' का नहीं बना, 'मदर इण्डिया' का नहीं बना, 'दोस्ती' का नहीं बना, 'कटी पतंग'- 'बॉम्बे का बाबू' -'आनंद'- 'आंधी' जैसी फिल्मों का सीक्वल नहीं बना और इन्होंने लादेन का सीक्वल बना दिया...
क्या च्याइस है!


26 Feb 2016

2.45 pm 

 

देखनीय 'नीरजा'

अझेलनीय फितूर

इमोशनल अत्याचार है साला खडूस

 

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