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पहले बागी केवल चम्बल इलाके में होते थे, आजकल सिनेमा के पर्दे पर होते हैं। चम्बल के बागी होने से आसान सिनेमा के बागी होना है। बागी होना युवाओं को आकर्षित भी करता है। अगर बागी टाइगर श्राफ हो और वह अपनी प्रेमिका के लिए बगावत करें, तो सबकुछ जायज होता है। पहले दिन पहले शो में खचाखच भरा सिनेमा हॉल और बीच-बीच में युवाओं की ताली की आवाज बता रही है कि फिल्म मनोरंजक है। जब फिल्म खत्म हुई, तब दो दर्शक बात कर रहे थे कि टिकट के पैसे तो छम-छम गाने में ही वसूल हो गए। यू-ट्यूब पर छम-छम गाना काफी लोकप्रिय हो चुका है।

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फिल्म में दिमाग का दही मत बनाइए। ढिशुम-ढिशुम और छम-छम का आनंद लीजिए। सिनेमा घर में आने वाले 13-30 साल तक के युवक-युवतियों के लिए यह फिल्म बनाई गई है। टाइगर श्राफ ने अपनी पूरी प्रतिभा इसमें निचोड़ दी है और श्रद्धा कपूर ने फिल्म में अपनी खूबसूरती से युवाओं को आकर्षित किया है। निर्देशक शब्बीर खान ने केरल के दृश्यों को बहुत ही खूबसूरती से फिल्माया है। दो गाने पहले ही लोकप्रिय हो चुके है। साजिद नाडियादवाला को और क्या चाहिए था?

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इस फिल्म में टाइगर श्राफ ने मार्शल आर्ट के वे जौहर भी दिखाए है, जो पहले उन्होंने फिल्मों में नहीं दिखाए। खबर आई थी कि टाइगर श्राफ जल्दी ही एक मार्शल आर्ट एकेडमी खोलने वाले हैं। यह निर्णय बिल्कुल सही होगा, क्योंकि अभिनय के नाम पर उनके चेहरे पर सीमित भाव भंगिमा ही आ पाती है। इस फिल्म में दोनों कलाकारों की केमेस्ट्री युवा दर्शकों को पसंद आएगी। श्रद्धा कपूर ने भी फिल्म में मार्शल आर्ट्स के जौहर दिखाए हैं। खलनायक की भूमिका में दक्षिण के अभिनेता सुधीर बाबू एक्टिंग में कहीं भी हीरो से कम नहीं नजर आए। एक क्रूर खलनायक की भूमिका में वे असली राघव नजर आए।

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टाइगर श्राफ के पास दिखाने के लिए अच्छी बॉडी और मार्शल आर्ट का हुनर है, सो उन्होंने उसका प्रदर्शन किया। किस से ज्यादा फ्लाइंग किस इस फिल्म में हीरोइन को बांटे। श्रद्धा कपूर के पास चेहरे की मासूमियत और नृत्य की प्रतिभा है, सो उन्होंने उसका प्रदर्शन किया। साजिद नाडियादवाला के पास बाप-दादा की बेहिसाब दौलत है, सो उन्होंने उसका उपयोग अक्लमंदी से किया और शानदार लोकेशन्स घुमवा दी। श्रद्धा कपूर से ज्यादा अंग प्रदर्शन टाइगर श्राफ से करवाया गया।

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फिल्म में एक्शन, स्टंट, थ्रिल, रोमांस और गीत-संगीत सभी कुछ है। कहानी में कोई खास नयापन नहीं है, लेकिन प्रस्तुति दिलचस्प है। साजिद नाडियादवाला ने इंडोनेशिया की फिल्म द रैड : रिडम्पशन को अपने तरीके से भारतीयकरण करके पेश किया है। 2004 में इसी कहानी पर वर्षम नामक फिल्म तेलुगु में बन चुकी है।

टाइगर श्राफ के लिए यह फिल्म निर्णायक साबित होगी। युवा दर्शकों को फिल्म पसंद आएगी।

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