
नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया मैनेजर्स का जवाब नहीं।
रक्षाबंधन के दिन (26 अगस्त को) मोदीजी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर 55 विशिष्ट महिलाओं को फॉलो करना शुरू कर दिया। इनमें बैडमिंटन खिलाड़ी अश्विनी पोनप्पा, टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा, एथलीट पीटी ऊषा, बाल अधिकार कार्यकर्ता डॉ. स्वरूप सम्पत ( परेश रावल की लुगाई, मिस इंडिया 1979 और ये जो है जिंदगी सीरियल की कलाकार) पत्रकार पश्यन्ति मोहित शुक्ला, रोमाना इसार खान, श्वेता सिंह, पद्मजा जोशी, शीला भट्ट, शालिनी सिंह, बॉलीवुड अभिनेत्री कोएना मित्रा, वेटलिफ्टर कर्णम मल्लेश्वरी, फोटो पत्रकार रेणुका पुरी शामिल हैं।

-- आज 23 अगस्त 2018 को अंतर्राष्ट्रीय हैशटैग डे है. #Hashtag11
-- दशमलव और शून्य के बाद शायद सबसे बड़ी गणितीय खोज।
-- आज से 11 साल पहले ही हैशटैग का जन्म हुआ था।
-- ट्विटर ने आज, 23 अगस्त को अंतर्राष्ट्रीय हैशटैग डे के रूप में मनाने का ऐलान किया है।
-- आठ साल पहले ऑक्सफ़ोर्ड शब्दकोष में यह शब्द शामिल किया गया था - #Hashtag .
--गूगल के एक डिजाइनर क्रिस मेसिना ने 23 अगस्त 2007 को सबसे पहले इसका उपयोग किया था।
(आपका स्वागत है, पर आप क्यों बार -बार पधारते हैं? पूरा प्रशासन ठप हो जाता है। इस गरीब और बीमारू राज्य पर दया करो प्रभु!)

माननीय,
नित्य प्रातः स्मरणीय,
महामहिम महोदय,
आप इस देश के सर्वोच्च पद पर आसीन हैं, तीनों सेनाएं आप के अधीन हैं, पूरा देश आपके नेतृत्व का कायल है, आप हमारे लिए पूजनीय हैं। माननीय,
एक छोटी सी कहानी सुनाना चाहता हूं। एक दद्दाजी थे। उन्हें लगा कि अब उनके जीवन के सक्रिय 5/6 साल बचे हैं।

#ट्रम्प_ट्रम्प कित्ते ट्वीट ?
मैं #ट्विटर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दोनों अकाउंट (President Trump @POTUS और Donald J. Trump@realDonaldTrump ) फॉलो करता हूं। रविवार ट्रम्प के दोनों ट्विटर अकाउंट को समर्पित रहा। रविवार (19/8/2018) को उन्होंने बोस्टन ग्लोब और न्यू यॉर्क टाइम्स पर जमकर भड़ास निकाली है।
#न्यूयार्क_टाइम्स ने अपने संपादकीय में लिखा था - "ट्रम्प लोकतंत्र की रगों में बहने वाले खून के लिए भी खतरनाक हैं."
...और #द_गार्डियन ने लिखा था - "हम अमेरिका की जनता के दुश्मन नहीं हैं। हम उनकी बेहतरी चाहते हैं लेकिन खुद की बेहतरी चाहने के लिए अमेरिकियों को अब अपनी आवाज उठानी होगी। हम आपको ट्रंप से बचाने नहीं आए हैं। हमारी जो बात ट्रंप को जंग लगती है, हमारे लिए वो रोजमर्रा का काम है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 12 मीडिया घरानों पर 10-10 लाख रूपए का जुर्माना अदा करने के लिए कहा। हाईकोर्ट का मानना है कि इन मीडिया घरानों ने कठुआ में 8 साल की बच्ची के साथ जबरदस्ती और हत्या की खबर में पीड़िता का नाम उजागर किया, जो मीडिया के सिद्धांतों के खिलाफ है। इस तरह के मामलों में पीड़िता की पहचान छुपाए रखने संबंधी कानूनों की अवहेलना के कारण यह आदेश दिया गया।

अटल बिहारी वाजपेयी केवल कवि और राजनेता ही नहीं थे। वे फिल्मों, अच्छे भोजन, अच्छी मित्रता में भी रूचि रखते थे। कई लोग उन्हें दिलचस्प और आशिक मिजाज भी मानते हैं। एक इंटरव्यू में अटलजी ने खुद कहा था कि मैं अविवाहित हूं, लेकिन कुंवारा नहीं। लोगों ने इस वाक्य के अपने हिसाब से अलग-अलग अर्थ निकाले। जो भी हो, अटलजी के लिए इन शब्दों के गंभीर मायने थे। वे प्रेम की सहजता और गंभीरता को भी समझते थे। वे न तो कभी किसी दूसरे के निजी मामलों में दखल देते और न ही अपने मामले में किसी दूसरे का दखल बर्दाश्त करते थे।

वरिष्ठ पत्रकार एस. निहाल सिंह उन लोगों में से थे, जिन्होंने 1975 में इमरजेंसी लगाए जाने का घोर विरोध किया था। वे 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद पाकिस्तान जाने वाले किसी भी भारतीय अखबार के पहले पत्रकार थे। सुरेन्द्र निहाल सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस और खलीज टाइम्स के संपादक तथा स्टेट्समैन के प्रधान संपादक के रूप में काम किया। इंडियन पोस्ट अखबार की बुनियाद ही उन्होंने रखी। वे ब्रिटेन, रूस, यूएसए, इंडोनेशिया आदि कई देशों में विशेष संवाददाता के तौर पर काम कर चुके थे।

हरिवंश जी विज़नरी पत्रकार रहे हैं, वे अच्छे सांसद भी माने जाते हैं और अब वे राज्यसभा के सफल उपसभापति भी साबित होंगे, इसमें कोई शक नहीं है। धर्मयुग में मुझसे पहले की पीढ़ी के, मेरे वरिष्ठ रहे, आजीवन सक्रिय पत्रकारिता करने वाले हरिवंश जी के राज्यसभा का उपसभापति बनने पर वास्तव में खुशी का एहसास हो रहा है। उनकी राजनीतिक प्रतिबद्धता के बारे में कुछ कहना नहीं चाहता, लेकिन एक पत्रकार के रूप में उन की प्रतिबद्धता हमेशा अपने पेशे के प्रति बनी रही। अपने जूनियर्स के साथ हमेशा मानवीय व्यवहार करने वाले और बेहद संवेदनशील पत्रकार हरिवंश ने प्रभात खबर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
राजेंद्र माथुर के बारे में गुंजन सिन्हा
१९८६ में स्व. राजेंद्र माथुर ने नवभारत टाइम्स, पटना, के लिए युवाओं की एक टीम चुनी और उससे कहा कि “हिंदी पत्रकारिता की मशाल हम यहाँ तक ले आये हैं. अब ये मशाल हम आपको सौंपना चाहते हैं, लेकिन हमे ज्यादा ख़ुशी होगी अगर आप इसे हमसे छीन सकें.”
हम नहीं छीन सके. हम क्या कोई नहीं छीन सका. उन्हें दिवंगत हुए २७ बरस बीत गए और उनके जाने के चार बरसों के भीतर नवभारत टाइम्स पटना बंद कर दिया गया. उन्होंने हमें जो स्नेह भरी चुनौती दी थी, वो ३२ साल बाद भी अनुत्तरित है.

पत्रकार और लेखक दीपक तिवारी 26 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं। आकाशवाणी, समाचार एजेंसी, अखबार आदि के बाद वे अंग्रेजी समाचार साप्ताहिक द विक में 20 साल से मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के राज्य संवाददाता हैं। मध्यप्रदेश की राजनीति पर उनकी अच्छी खासी पकड़ है। पिछले दिनों बहचर्चित किताब ‘राजनीतिनामा मध्यप्रदेश (2003 से 2018) भाजपा युग’ का लोकार्पण हुआ। इसके पहले वे ‘राजनीतिनामा मध्यप्रदेश (1956 से 2003) कांग्रेस युग’ लिख चुके हैं। इस तरह उन्होंने 1956 में मध्यप्रदेश बनने के बाद की राजनीति को कांग्रेस युग और भाजपा युग में लिपिबद्ध किया है।

रविवार की सुबह करीब 11 बजे कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने ट्विटर अकाउंट @RahulGandhi से एक ट्वीट करके खलबली मचा दी। एक फ़्रांसिसी हैकर के ट्वीट पर आधारित समाचार उद्घृत करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए लिखा
-- "हेलो, मेरा नाम नरेंद्र मोदी है, मैं भारत का प्रधानमंत्री हूं। जब आप मेरे आधिकारिक ऍप को साइनअप करते हैं, तब मैं आपका सारा डाटा अमेरिकी कंपनियों के अपने दोस्तों को दे देता हूं."
राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि जो भी नागरिक नमो ऍप का इस्तेमाल करता है, उसकी तमाम जानकारियां उस ऍप को इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति की अनुमति के बिना अमेरिकी कंपनी से साझा की जा रही है।