
जिन लोगों को यह लगता है कि घोटाले होते रहते है और अपराधी को सजा नहीं होती, उन्हें याद दिलाना चाहूंगा कि ऐसा नहीं है। आजाद भारत में घोटालों की शुरूआत तो जीप घोटाले से 1948 में ही हो गई थी, लेकिन वह घोटाला उतना बड़ा नहीं था, जितना हरिदास मूंदड़ा घोटाला था। जीप घोटाले में 1500 जीप खरीदने का ऑर्डर दिया गया था और जीप 9 महीने बाद भी डिलीवर नहीं हुई थी। रकम भी मामूली ही थी। प्रति जीप 300 ब्रिटिश पाउंड, लेकिन मूंदड़ा घोटाले में रकम 1 करोड़ 20 लाख थी, जो वर्तमान कीमतों के हिसाब से 360 करोड़ रुपए से ज्यादा की बैठती है। जब यह घोटाला हुआ, तब 1957 में सोने का दाम 95 रूपए प्रति 10 ग्राम था। आज सोना 30 हजार रूपए से अधिक प्रति 10 ग्राम है।

कोई भी शहर केवल उसके इतिहास के कारण नहीं होता। कोई भी शहर उसकी सड़कों, मॉल, बाजार, भवन और वहां के कारोबार के कारण नहीं होता। कोई भी शहर बनता है वहां के लोगों से। अगर आप समझते हैं कि इंदौर केवल पोहा-जलेबी का शहर है, इंदौर केवल कचोरी और मालपुए का शहर है, पेटिस और हॉट डॉग का शहर है तो शायद आप गलत हैं। इंदौर शहर है यहां के करीब 31 लाख लोगों से और इंदौर है उन लोगों के जैसा। इस किताब की भूमिका में रमण रावल ने लिखा है :
इंदौर के सितारे भाग 3 में थोड़ी देर हुई। इंदौर के जनजीवन में जिन महानुभावों ने अपने कर्म, ज्ञान ,गुण, सेवा से उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराई हो, उनके बारे में उनकी रचनाधर्मिता के बारे में, उनके संघर्ष और पराक्रम के बारे में, वह मुद्दे सामने लाए जाएं जो आमतौर पर नजर नहीं आते। यह समाज का सामान्य नियम है कि जो लोग कुछ बेहतर कर सकते हैं दूसरे दिन से काफी कुछ सीख समझ सकते हैं, जो अपने अपने क्षेत्र में सफल स्थापित हैं। उनके जीवन दर्शन को उनके तौर-तरीकों को विशेष समाज भी जानें। इसका सीधा फायदा यह है कि दूसरों को भी वैसा ही करने की प्रेरणा मिलती है।

क्या बॉलीवुड की अभिनेत्री सनी लियोन का ताज खतरे में नजर आ रहा है क्योंकि अब मिया मल्कोवा भी बॉलीवुड की फिल्मों के मैदान में आ गई हैं. अब बॉलीवुड में रामगोपाल वर्मा अपनी आने वाली फिल्म में मिया मल्कोवा को लेकर आ रहे हैं. इस फिल्म का ट्रेलर रिलीज भी हो गया है. ऐसा माना जाता है कि मिया मल्कोवा बॉलीवुड में तहलका मचा देगी और हो सकता है कि वह सनी लियोन को कड़ी टक्कर दें.

भारतीय सेना के दो जवानों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने के खिलाफ सोशल मीडिया पर जिस तरह बीजेपी को लानतें भेजी जा रही हैं, वे गौर करने लायक हैं। भारतीय सेना की दसवीं गढ़वाल यूनिट के मेजर आदित्य के नेतृत्व में सैनिकों ने दो पत्थरबाजों को गोली मार दी थी, उसके बाद सेना के जवानों के विरूद्ध हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया। सैनिकों के खिलाफ जो धाराएं लगाई गई है, वे है दफा 302, 307 और 336। जम्मू-कश्मीर में इंडियन पेनल कोड लागू नहीं होता, इसलिए वहां रणबीर पेनल कोड (आरपीसी) के तहत यह धाराएं लगाई गई है। जम्मू-कश्मीर की पुलिस ने जांच कमेटी बैठा दी है और तमाम लोगों से पूछताछ हो रही है कि इस मामले में क्या घटा और कैसे?

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन में राष्ट्रीय सुरक्षा उप सलाहकार रहे एंटोनी जॉन ब्लिंकेन ने न्यू यॉर्क टाइम्स में एक लेख लिखा हैं, जिसमें उन्होंने राय व्यक्त की है कि विश्व नेतृत्व से अमेरिका धीरे-धीरे पीछे खिसक रहा है और जिस तरह से चीन आगे बढ़ रहा है, उससे यह संभव है कि वह विश्व का नेतृत्व करने लगे। उन्होंने चीन की कूटनीतिक गतिविधियों के हवाले से कहा है कि चीन के वर्तमान राष्ट्रपति शी जिनपिंग बहुत तेजी से चीन को वैश्विक परिदृश्य पर उभार रहे हैं। चीन में लोकतंत्र नहीं है, वहां पर्यावरण की स्थिति चिंताजनक है और मानव अधिकारों की बात करना ही फिजूल है, लेकिन फिर भी जिस तरह चीन आगे बढ़ रहा है, वह पूरी दुनिया के लिए गंभीर बात हो सकती है।

कासगंज मामले में ट्विटर पर की जा रही टिप्पणियों की समीक्षा और शिकायतों के बाद ट्विटर ने हिन्दुत्व समर्थक पूर्व पत्रकार जागृति शुक्ला का ट्विटर अकाउंट सस्पेंड कर दिया। जिस ट्वीट के कारण ट्विटर ने यह कार्रवाई की, उसमें जागृति ने किसी धर्म का नाम नहीं लिखा था, लेकिन ऐसा माना गया कि यह ट्वीट मुस्लिम समाज के लोगों को निशाने पर रखकर किया गया था। जागृति शाह के ट्वीट पर अनेक लोगों को आपत्ति है, इसके पहले भी लोगों ने जागृति के ट्वीट पर आपत्तियां जताई थी।
अमित शाह का जन्मदिन !

मैं भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह की कई बातों का आलोचक हूँ, उनसे घोर असहमत रहता हूं, लेकिन फिर भी मैं उनका बड़ा प्रशंसक हूं. आमतौर पर जिस तरह कोई व्यापारी केवल अपने मुनाफ़े से मतलब रखता है, उसी तरह अमित शाह केवल भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिक लाभ से मतलब रखते हैं. उनका लक्ष्य 'किसी भी तरह' भारतीय जनता पार्टी को फायदा पहुंचाने का रहता है, इस में नैतिकता-अनैतिकता वे देखते नहीं हैं शायद !
अमित शाह शतरंज के माहिर खिलाड़ी हैं. रंगमंच पर अभिनय भी किया है और वे शास्त्रीय संगीत में रुचि रखते हैं. राजनीति में भी शास्त्रीय संगीत की तर्ज पर शतरंज खेलते हैं. वे कब प्यादे को वजीर बना देते हैं, कब राजा, घोड़ा और कब प्यादा, घोड़ा बन जाता है, और कब वजीर ऊंट के खाने में बैठने पर बाध्य हो जाता है, यह सामने वाले को समझ में नहीं आता. अमित शाह की अगली चाल कौन सी होगी, उनकी पार्टी के लोग भी नहीं जान पाते!

हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि अमेरिका में बौद्ध धर्म के प्रति वहां के लोगों का रूझान बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी लोग बौद्ध धर्म को धर्म के रूप में कम और जीवनशैली के रूप में ज्यादा स्वीकार करते है। बड़ी संख्या में लोग बौद्ध धर्म के बारे में जानकारी प्राप्त कर रहे है और बिना बौद्ध धर्म अपनाए बौद्ध धर्म की खूबियों को अपने जीवन में उतारने की कोशिश कर रहे हैं।

ट्विटर ने गुरमीत राम रहीम का अकाउंट रोक दिया है। अब इस अकाउंट में कोई गतिविधि संभव नहीं है। डेरा प्रमुख के इस ट्विटर अकाउंट पर 30 लाख 57 हजार से अधिक फॉलोअर्स थे। ट्विटर ने गुरमीत की कथित बेटी हनीप्रित इन्सान का अकाउंट भी रोक लिया है। इन दोनों ट्विटर अकाउंट का उपयोग गुरमीत राम रहीम के प्रचार के लिए होता रहा है। फेसबुक पर बाबा गुरमीत से जुड़े करीब 22 अकाउंट को बंद करने के लिए भी पुलिस कोशिश कर रही है।

'शोले' की तरह 'पद्मावात' फिल्म के डॉयलॉग चर्चित होंगे--क्योंकि इनमें चित्तौड़, मेवाड़, राजपूतों, सूर्यवंशियों और राजपूत-नारी की आन - बान - शान की बात कही गई है; जैसे --
"राजपूती कंगन में उतनी ही ताकत है जितनी राजपूती तलवार में..." --पद्मावती (दीपिका पादुकोण)
"चिंता को तलवार की नोक पे रखे, वो राजपूत...रेत की नाव लेकर समुंदर से शर्त लगाए, वो राजपूत...और जिसका सर कटे फिर भी धड़ दुश्मन से लड़ता रहे, वो राजपूत "-- राजा रतनसेन (शाहिद कपूर)
"कह दीजिए अपने सुल्तान से कि उनकी तलवार से ज्यादा लोहा हम सूर्यवंशी मेवाड़ियों के सीने में है..." --राजा रतनसेन ( शाहिद कपूर)
"असुरों का विनाश करने के लिए देवी को भी गढ़ से उतरना पड़ा था. चित्तौड़ के आंगन में एक और लड़ाई होगी जो न किसी ने देखी होगी न सुनी होगी. और वो लड़ाई हम क्षत्राणियां लड़ेंगी. और यही अलाउद्दीन के जीवन की सबसे बड़ी हार होगी." --पद्मावती ( दीपिका पादुकोण)
राष्ट्रीय मीडिया कॉन्क्लेव की रिपोर्ट

संस्था विकास संवाद का ग्यारहवां वार्षिक आयोजन ओरछा में 18 से 20 अगस्त 2017 तक आयोजित हुआ। विषय रहा - ‘मीडिया, बच्चे और असहिष्णुता’। आयोजन के आधार पत्र में लिखा गया है - ‘‘आज कल मीडिया का जिक्र भी राग दरबारी के उस बहुउद्घ्रत प्रसंग की तरह हो गया है, जिसमें शिक्षा व्यवस्था की जगह अगर मीडिया को रख दें, तो उसे सड़क की कुटिया मानकर हर कोई लात जमाता चलता है। लोकतंत्र की झंडाबरदार राजनीतिक जमातों और नौकरशाही से लेकर कोई भी सड़क चलता इंसान किसी भी छोटी-मोटी बात पर मीडिया को भी गरियाता रहता है... मीडिया खुद के ‘बिक जाने,’ ‘तोड़-मरोड़कर पेश करने’ से लगाकर ‘सत्ता में सहयोगी’ तक की गालियों से नवाजा भी जाता है।’’