
प्रेत-आत्माएं बहुत हरामी होती हैं। वे अक्सर राजकुमारी की काया में जा छुपती हैं। राजकुमारियां मूर्ख होती हैं, जो राज परिवार छोड़कर गडरियों के चक्कर में पड़ जाती हैं। कुछ गडरिये बहुत चालू होते हैं। जेल में जाने पर वे काला जादू सीख जाते हैं। काले जादू की स्पीड 6जी इंटरनेट से भी ज्यादा होती है। मेवाड़ में बैठकर लंदन तक इसका काम चल जाता हैं। अगर आप पर किसी ने काला जादू किया है या भूत-प्रेत का टोटका चल रहा है, तो फिल्म देखने जा सकते है। हां, अगर किसी पागल कुत्ते ने काटा हो तो भी जा सकते हैं। यह फिल्म हमारे राष्ट्रीय संसाधनों का खालिस अपव्यय है।

प्रेत-आत्माएं मल्टी लिंगुवल होती हैं। राजस्थान में हिन्दी और लंदन में अंग्रेजी समझती हैं। वे नॉन वेजिटेरियन भी होती हैं और मांस देखते ही टूट पड़ती हैं। प्रेत-आत्माएं शराब की भी शौकीन होती हैं और उन्हें बोतल में बंद किया जा सकता हैं। वे दुनियाभर के कम कर सकती हैं, लेकिन बोतल नहीं फोड़ पाती हैं बेचारी। कभी-कभी फोड़ भी लेती हैं। कब्रस्तान उनका फेवरेट पिकनिक स्पॉट है। पर वे भगवान, ओम, मंदिर, चर्च आदि से डरती हैं। गंगाजल उनके लिए तेजाब जैसा होता हैं।
...अब इसके आगे लिखना हो तो यहीं लिखा जा सकता है कि इस फिल्म के लेखक विक्रम भट्ट का दिमाग फिर गया हैं। निर्देशक टीनू सुरेश देसाई की यह पहली फिल्म है और बकवास। बकवास इसलिए कि यह फिल्म मनोरंजन नहीं करती, डराती नहीं, आंखों को नहीं लुभाती, कानों को अच्छी नहीं लगती, धीमी गति से दी जाने वाली सजा के मानिंद है यह फिल्म। इस फिल्म का नाम 1920 लंदन नहीं, 420 लंदन होना चाहिए था। इससे तो अच्छा है कि आप टीवी पर आहट का कोई एपिसोड ही देख लो।

बॉलीवुड में एेसे लोगों की कमी नहीं है, जो मानते हैं कि काला जादू संभव है। अध्ययन सुमन ने पिछले दिनों एक इंटरव्यू में आरोप लगाया था कि कंगना रनौत काला जादू जानती हैं और कंगना ने अध्ययन पर काला जादू कर रखा था। शरमन जोशी ने भी इस फिल्म के रिलीज होने से पहले एक इंटरव्यू में कहा था कि वे जादू-टोने और काले जादू में भरोसा करते हैं।
1920 सीरिज की यह तीसरी फिल्म हैं। विक्रम भट्ट ने इसके पहले राज सीरिज की फिल्में बनाई थी, वे चल गई, तो उन्हें लगा कि वे कुछ भी लिखेंगे, वह चल जाएगा। महाराष्ट्र में बासी रोटियों का एक व्यंजन बनता हैं, जिसका नाम है कुस्करा। यह फिल्म पुरानी बासी फिल्मी रोटियों का बदबूदार कुस्करा हैं।
राजस्थान के मेवाड़ की कोई प्रिंसेस शिवांगी है, जो लंदन में अपने पति राजा वीरसिंह के साथ रहती है। एक दिन उसे पार्सल से एक तोहफा मिलता हैं, जिसमें एक लॉकेट रहता है, वह लॉकेट पाते ही वीरसिंह की तबीयत खराब हो जाती हैं। किसी ने उस पर काला जादू कर दिया हैं। प्रिंसेस अपने भूतपूर्व लवर को संदेश भेजती हैं और उसे लेने जाती हैं, ताकि बुरी आत्माओं से लड़ सके। पर यह भूतपूर्व लवर जो काले जादू को उतारने की क्षमता जानता हैं, खलनायकी पर उतर आता हैं। प्यार मोहब्बत का वास्ता मिलने पर वह काले जादू से निपटने की योजना बनाता हैं और जो हरकतें करता हैं वह आहत धारावाहिक से भी घटिया होती हैं।

लंदन में मेवाड़ का परिवार उसी शानो-शौकत से रहता हैं, लेकिन उनके घर में एक नौकरानी और एक ड्रायवर के अलावा कोई नहीं होता। मेवाड़ का यह राज परिवार इतना कम अक्ल हैं कि उसकी राजकुमारी रात को डर लगने पर मोमबत्ती लेकर घूमती हैं और अपने महल की बिजलियां नहीं जलाती। काले जादू के प्रभाव से मुक्त कराने के लिए वह अपने पति को लंदन के अस्पताल से निकालकर महल ले आती हैं, जबकि पूरी दुनिया के लोग इलाज कराने लंदन जाते हैं। लंदन की टेम्स नदी में प्रदूषण फैलाने की कोई कोशिश नहीं छोड़ते यह लोग और टोने-टोटके का लॉकेट रात तीन बजे नदी में फेंकने चले जाते हैं।
इस टोने-टोटके और काले जादू के बीच में गाने भी आते हैं और रोमांटिक गाने आते हैं। दर्शक बेचारा समझ ही नहीं पाता कि वह काले जादू से डरे या रोमांटिक गानों से आनंदित हो। इस फिल्म में शरमन जोशी और करमचंद सीरियल वाली शर्मिष्ठा मुखर्जी फालतू खर्च हो गए। प्रियंका चोपड़ा की चचेरी बहन मीरा चोपड़ा की एक्टिंग भी कोई खास नहीं है।
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