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चॉक एन डस्टर फिल्म तो अच्छी है, पर चलेगी नहीं। क्योंकि अच्छी फिल्में आजकल कहां चलती है। वैसे भी सिनेमा घर में शिक्षा व्यवस्था, स्कूल मैनेजमेंट और शिक्षकों के रिश्ते तथा विद्यार्थियों और शिक्षकों के नाजुक रिश्ते पर फिल्म देखना ही कौन चाहता है। इसे बिहार में टैक्स फ्री कर दिया गया है और कुछ दूसरे राज्यों में भी टैक्स फ्री होने की संभावना है। टैक्स फ्री होने के बाद भी यह फिल्म चल पाएगी, इसमें शक है।

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‘‘यार ये साला विधु विनोद चोपड़ा पिक्चर तो अच्छी बनाता है रे’’ सिनेमाघर से बाहर निकलते समय दर्शक बात कर रहे थे।

"और वो लम्बू, साले की दोनों टांगे नहीं रहती फिर भी अच्छी एक्टिंग कर गया यार।"

"अपने सवानंद करकरे का भी गाना था इसमें। कौन सा था ?"

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नाम 'दिलवाले' है, पर 158 मिनट की फिल्म में एक मिनट की भी कोई बात ऐसी नहीं है जो दिल को छू सके। शाहरुख़ और काजोल की जोड़ी को भावनाप्रधान अभिनय के लिए याद किया जाता है, लेकिन दिलवाले में दोनों ही एंटी हीरो और एंटी हीरोइन जैसे लगते हैं। दोनों ही भारत से बुल्गारिया एक्सपोर्ट हो चुके 'डॉनों' की औलाद हैं, जो खानदानी प्रतिस्पर्धी और दुश्मन हैं, और बुल्गारिया में गुण्डागर्दी की फील्ड में भारत का नाम रोशन करते-करते काल के गाल में समा जाते हैं। विनोद खन्ना के पुत्र शाहरुख़ और कबीर बेदी की प्रतिभाशाली बेटी काजोल धंधे में बाप का काम आगे बढ़ाते हैं और धंधे की ज़रूरत के लिए मोहब्बत का नाटक करते हैं, पर रहते हैं खून के प्यासे ! दोनों एक दूसरे को मार नहीं पाते. तस्कर बापों की मौत के बाद दोनों अलग अलग भारत आ जाते हैं।

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इस फिल्म के सभी 13 हीरो वास्तव में मूक बधिर बच्चे है। यह फिल्म उन्हीं 13 बहादुर बच्चों को लेकर बनाई गई है, जिनका इरादा हिमालय की एक ऊंची पर्वत माला पर चढ़ने का है। माउंटेनियरिंग और राफ्टिंग पर आधारित यह फिल्म विशेष योग्यता वाले बच्चों के प्रति नजरिया बदल देती है। हम जिन्हें डिसेबल कहते हैं, वे वास्तव में अतिरिक्त योग्यता वाले बच्चे है।

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संजय लीला भंसाली मगल-ए-आजम की तर्ज पर पेशवा-ए-आजम बनाने निकले थे, पर वह बन गई जोधा अकबर और देवदास का मिक्स्चर। जोधा अकबर का राजसी वैभव और हिन्दूू-मुस्लिम सामंजस्य तथा देवदास का प्रेम त्रिकोण। फिल्म पर मेहनत बहुत की गई है पर वह हर वर्ग के दर्शक को पसंद आएगी ही, यह नजर नहीं आता।

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हेट स्टोरी-3 फिल्म ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया - यह सोचने पर कि मैं यह फिल्म देखने ही क्यों आया?

ऐसी फिल्म की क्या समीक्षा की जाए, जिसका मीडिया पार्टनर यौन शक्ति बढ़ाने वाला राजसी केप्सुल हो। गाने की लाइन तो देखिए- सर्दी में गर्मी है, बड़ी बेशर्मी है। एक और गाने की लाइन है- तेरी मां की- तेरी मां की बात क्यों सुनी? जिन लोगों ने हेट स्टोरी और हेट स्टोरी-2 नहीं देखी है, उन लोगों को यह फिल्म देखने की जरूरत नहीं, क्योंकि इस फिल्म का उससे कोई नाता नहीं है और जिन लोगों ने हेट स्टोरी देखी है, उन्हें भी यह देखने की कोई जरूरत नहीं है।

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