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विजय मनोहर तिवारी ने अपनी मां श्रीमती सावित्री तिवारी को अलग तरीके से विदाई दी। उन्होंने अपनी मां की स्मृति में 8 पेज का वर्ल्ड क्लास का अखबार छापा है, जो केवल परिजनों के लिए है। इस अखबार में श्रीमती सावित्री तिवारी के जीवन से जुड़ी लगभग सभी बातों को पिरोने की कोशिश की गई है। विजय जी का कहना है कि जमींदार और राजे-महाराजे छत्रियां बनवाते थे, लेखक लोग किताब लिखते है, मूर्तिकार मूर्तियां बनाते है तो मैंने सोचा कि मैं अपनी मां के लिए अखबार निकाल दूं।

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2015 में कई बड़े-बड़े कलाकारों की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर धूल चाटती रही। कई निर्माता-निर्देशकों के मुगालते दूर हो गए। कई स्टार टूट कर जमीन पर आ गए। अक्षय कुमार की दो-दो फिल्में सिंग इज ब्लिंग और ब्रदर्स फ्लॉप रहीसैफ अली खान की फैंटम को किसी ने नहीं पूछा। इमरान हाशमी की मिस्टर एक्स और हमारी अधूरी कहानी फ्लॉप रही। रणवीर कपूर की लगातार तीसरी फिल्म फ्लॉप रही। शाहिद कपूर की शानदार, ऐश्वर्या राय की जज्बा, अभिषेक बच्चन की ऑल इज वेल, अनिल कपूर, प्रियंका चौपड़ा, अनुष्का शर्मा की दिल धड़कने दो और बॉम्बे वेल्वेट, रॉय, शमिताभ, तेवर जैैसी बड़े बजट की फिल्मों ने भी बॉक्स ऑफिस पर पानी नहीं मांगा। छोटे बजट की कई फिल्में तो कब आई और कब चली गई, पता ही नहीं चला। शाहरूख खान की दिलवाले ने भले ही अलग-अलग स्त्रोतों से कमाई कर ली हो, लेकिन फिल्म वैसा व्यवसाय नहीं कर पाई, जिसकी आशा थी। बाहुबली ने दक्षिण की फिल्म होते हुए भी अच्छा बिजनेस किया, लेकिन बॉलीवुड में बनने वाली पीके और धूम-3 का रिकार्ड 2015 मेंं नहीं टूटा।

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भारतीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने जेम्स बांड की नई फिल्म स्पेक्टर के चुम्बन दृश्यों में कांट-छांट क्या कर दी; एक खास वर्ग के लोगों को इसे तूल देने का मौका मिल गया। यह फिल्म देखने के बाद में कह सकता हूं कि इस फिल्म में चुम्बन के दृश्य छोटे कर देने से कहानी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। हां, यह बात जरूर है कि एक खास वर्ग के लोग जो जेम्स बांड की फिल्में चुम्मा-चाटी की वजह से देखते है, वे थोड़े निराश जरूर हुए होंगे। सोशल मीडिया पर ‘संस्कारी जेम्स बांड’ सीरिज ही शुरू हो गई। इसमें प्रेरणा का काम उन लोगों ने किया, जिनके इस फिल्म से हित जुड़े हुए थे। एक से बढ़कर एक लतीफे और फोटोशॉप की हुई तस्वीरें इस संस्कारी जेम्स बांड के नाम की जाने लगी। जिस तरह आलोक नाथ और आलिया भट्ट के लतीफे सोशल मीडिया पर आम हो गए थे, वैसे ही जेम्स बांड के भी होने लगे।

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टीआरपी बढ़ाने या प्रसार संख्या में इजाफा करने के इरादे से मीडिया में खबरें तेजी से प्रचारित-प्रसारित करने की होड़ लगी हुई है। इसमें सच्चाई की परख किए बिना समाचार देने की जल्दबाजी की जाती है। बाद में जब सच सामने आता है, तब भी भूल सुधार नहीं की जाती और न ही माफी मांगी जाती है। इससे मीडिया की विश्वसनीयता संकट में आती जा रही है। ऐसे कई उदाहरण पिछले दिनों देखने को मिले हैं।

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गांधीवादी नेता मोरारजी देसाई ऐसे खब्ती नेता थे, जिनसे बात करना बहुत मुश्किल होता था। मुझे तीन बार उनसे मिलने का मौका मिला। ये मुलाकातें उनके मुंबई के नरीमन पाइंट स्थित घर पर हुई। वे भारत के प्रधानमंत्री रह चुके थे। उन पर तमाम आरोप लगे थे और बाद में भी लगते रहे। आरोपों से हमेशा अविचलित रहने वाले मोरारजी देसाई मुझे एक शिक्षक की तरह लगे।

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8 दिसंबर को इंदौर में प्रदर्शन के बहाने दंगे के हालात देखने को मिले। हालात का पूवार्नुमान शासन-प्रशासन में बैठे लोग नहीं कर पाए। पूरा शहर अराजकता की भेंट चढ़ गया। अब भी नहीं जागे, तो हालात बदतर हो सकते है और इसका खामियाजा आने वाली पीढि़यों को भुगतना पढ़ेगा। उत्तरप्रदेश में अगले साल होने वाले चुनाव की तैयारी राजनैतिक दल अपने-अपने हिसाब से कर रहे है। पहले लखनऊ में हिन्दू महासभा के अध्यक्ष का आपत्तिजनक बयान आता है, गिरफ्तारी होती है और विरोध अन्य राज्यों में भी होने लगता है। मांग यह होती है कि हिन्दू महासभा नेता को फांसी पर लटका दिया जाए। यह भारत को इस्लामिक स्टेट बनाने की साजिश का सीधा-सीधा प्रयास है। अगर किसी ने गैरकानूनी काम किया है, तो कानून अपने तरीके से ही काम कर सकता है और जो सजा उपयुक्त होगी, मिलेगी ही।

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दुनिया के 50 से ज्यादा देश ऐसे हैं, जिनकी आबादी इंदौर से कम है। इंदौर भले ही मध्यप्रदेश की राजधानी न हो, वह यूएसए की राजधानी वाशिंगटन, फ्रांस की राजधानी पेरिस और कनाडा की राजधानी ओटावा से बड़ा शहर है। इस शहर ने देश को कई ऐसी शख्सियतें दी हैं, जिन्होंने दुनिया में नाम कमाया है। लता मंगेशकर, एमएफ हुसैन, उस्ताद बड़े अमीर खां साहब, सलमान खान तो उनमें से कुछ नाम ही हैं। इंदौर में ऐसे अनेक सितारे अब भी रहते है, जिन्हें लोग बहुत अच्छी तरह नहीं जानते। उन्हीं सितारों से परिचित कराने के लिए रमण रावल ने अपनी किताब इंदौर के सितारे की दूसरी कड़ी प्रकाशित की है।

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इंदौर के आर्गेनिक हाट बाजार ‘जैविक सेतु’ का एक साल पूरा होने पर सोलर पंच नाम के बैंड ने शानदार प्रस्तुति दी। मैंने कभी सोलर पंच का नाम नहीं सुना था, लेकिन जैविक सेतु में ही पता चला कि न्यूयॉर्क मेंं एक ऐसा बैंड है, जो सोलर पॉवर से ही अपने तमाम साजों को चार्ज करता है। मतलब कि इसके सारे म्युजिक इंस्टूमेंट सोलर पॉवर से ही एम्प्लीफाय करते है। रविवार के दिन दोपहर में पेड़ के नीचे बैठकर पूरी तरह प्राकृतिक वातावरण में सोलर पंच बैंड का संगीत सुनना अपने आप में विलक्षण अनुभव था।

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 अब नेपाल भी भारत को आंखें दिखा रहा है। वहां भारत विरोधी प्रचार किस स्थिति तक पहुंच गया है, उसकी झलक यहां दिए जा रहे चित्रों और कार्टूूनों से स्पष्ट है। भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तो नेपाल को अपना सबसे करीबी मित्र घोषित कर चुके थे। फिर ऐसा क्या हुआ कि नेपाल दूर छिटक गया। क्या इसके पीछे भारतीय कूटनीति की हार है या चीन का बढ़ता वर्चस्व। जो भी हो यह भारत के लिए अच्छे संकेत नहीं है। भारत के प्रति नेपाल के कुछ खास वर्ग के लोगों की यह नाराजगी नेपाल के संविधान को स्वीकार करने के साथ ही प्रकट होने लगी। नेपाल का संविधान स्वीकार करने के पहले भारत को यह अपेक्षा थी कि वह नेपाल में रहने वाले मधेसी लोगों के साथ न्याय करेगा, वह पूरी नहीं हो पाई। 

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लोग अपनी बेटियों के नाम गंगा, जमुना, कांवेरी, गोदावरी, तीस्ता आदि रखते हैं, कोई भी अपनी बेटी का नाम चम्बल क्यों नहीं रखता? यह सवाल उठा चम्बल क्षेत्र के विधायक पुत्र राकेश रुस्तम सिंह की संस्था सामाजिक समरसता मंच के बैनर तले चम्बल गौरव कार्यक्रम में। चम्बल क्षेत्र के विकास के लिए गठित सामाजिक समरसता मंच ने एक नई पहल की है। जिसके तहत चम्बल के पुरातत्व, चंबल के बीहड़ और प्रकृति से दुनिया को परिचित कराने का अभियान शुरू किया गया है। 

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मीडिया भले ही उसे मंदी न कहे, स्लो डाउन या कुछ और कहे या कुछ भी न कहे पर मंदी तो है। यूएसए की हालत मंदी में पतली हो रही है। चीन का भी यही हाल है। यूके, जर्मनी, फ्रांस सब इसी अंधड़ के शिकार हैं। भारतीय मीडिया मंदी की खबरों को नहीं दिखाता। सेंसेक्स के पांच सौ अंक नीचे गिरने तक की खबरें पूरी तरह गायब कर दी जाती है। बाजार खाली पड़े हैं और उस पर कोई चर्चा नहीं होती। अखबारों के पन्नों से, टीवी चैनलों और होर्डिंग्स से विज्ञापन लगातार लापता होते जा रहे हैं। मीडिया को यह डर है कि अगर उसने मंदी की खबरों को दिखाया, तो इसका बाजार पर और भी उल्टा असर पड़ेगा।

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